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भर्ती प्रक्रिया में मामूली बदलाव के आधार पर नहीं होगा चयन निरस्त, नियुक्तियां निरस्त करने की याचिका खारिज

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में हुई नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा है कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियमों में कोई मामूली प्रशासनिक बदलाव किया जाता है और वह सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होता है, तो उसे अवैध नहीं माना जा सकता।

दुर्ग के फैमिली कोर्ट में वर्ष 2022 में स्टेनोग्राफर और सहायक ग्रेड-3 के 14 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। खुशबू देवांगन, जितेंद्र कुमार सिन्हा और प्रमोद मानिकपुरी ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। कहा कि विज्ञापन के अनुसार परीक्षा में 50 प्रश्न पूछे जाने थे, लेकिन केवल 25 प्रश्न ही पूछे गए। इसके अलावा, परीक्षा से मात्र दो दिन पहले चयन समिति का पुनर्गठन कर प्रिंसिपल जज ने खुद को इसका अध्यक्ष नियुक्त कर लिया था। याचिकाकर्ताओं ने इसे चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरी भर्ती को रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता से समीक्षा करने के बाद याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सिरे से नकार दिया। पाया कि लगभग 3775 आवेदनों को देखते हुए चयन समिति ने प्रशासनिक सुविधा के लिए प्रश्नों की संख्या घटाई थी, लेकिन कुल अंक 100 ही रखे गए थे यह बदलाव सभी परीक्षार्थियों के लिए समान था, जिससे किसी के साथ भेदभाव नहीं हुआ।

अपने 42 पन्नों के विस्तृत फैसले में हाई कोर्ट ने कहा है कि जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में स्वेच्छा से शामिल हुए और असफल रहे, वे परिणाम आने के बाद प्रक्रिया की खामियों पर सवाल नहीं उठा सकते । इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने उन सफल उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया जिनके अधिकार इस फैसले से प्रभावित हो सकते थे, जो कानूनन एक बड़ी चूक है। इस आधार पर हाई कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

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