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मन्नत पूरी होने पर कश्यप परिवार ने 20 डिसमिल जमीन समर्पित कर बनाया नर्मदेश्वर महादेव धाम,नर्मदा तट के एक अखंड पत्थर से बने हैं 11 फीट के नर्मदेश्वर महादेव,सावन में उमड़ रहे श्रद्धालु

बिलासपुर। सावन के पवित्र महीने में शहर में भगवान शिव की भक्ति का रंग चढ़ा हुआ है। सुबह होते ही शहर के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। इसी आस्था के बीच चांटीडीह नई सब्जी मंडी के पास स्थित नर्मदेश्वर महादेव धाम इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
धाम में स्थापित 11 फीट ऊंचे नर्मदेश्वर महादेव की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है। बताया जाता है कि यह शिवलिंग नर्मदा नदी के तट से प्राप्त एक ही अखंड पत्थर से निर्मित है। शिवलिंग में किसी प्रकार का जोड़ नहीं है। विशाल शिवलिंग के साथ अलग से जलहरी स्थापित की गई है,जहां भक्त लगातार जलाभिषेक कर रहे हैं।

दो ट्रकों से लाया गया विशाल शिवलिंग

मंदिर के सेवादार एवं व्यवस्थापक जितेंद्र कश्यप ने बताया कि 11 फीट के नर्मदेश्वर महादेव को उज्जैन में ओंकारेश्वर के समीप नर्मदा नदी के तट से लाया गया है। इतने विशाल शिवलिंग को बिलासपुर तक पहुंचाना भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। इसे दो ट्रकों के माध्यम से उज्जैन से बिलासपुर लाया गया। मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना के लिए क्रेन की सहायता ली गई।
जितेंद्र कश्यप के अनुसार, केवल शिवलिंग को बिलासपुर लाने में ही दो लाख रुपये से अधिक का परिवहन खर्च आया। विशाल और अखंड पत्थर से निर्मित शिवलिंग को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक कर रहे हैं।

नंदी महाराज की भव्य प्रतिमा भी आकर्षण

नर्मदेश्वर महादेव धाम परिसर में भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज की विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नंदी की प्रतिमा करीब 5 फीट लंबी और 4 फीट ऊंची है। शिवलिंग के सामने विराजमान नंदी की प्रतिमा मंदिर परिसर की भव्यता को और बढ़ाती है।
सावन के सोमवार के साथ ही नागपंचमी के अवसर पर भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक कराया गया। 17 अगस्त को नागपंचमी के अवसर पर विशेष अभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

माता-पिता की मन्नत पूरी करने लिया मंदिर निर्माण का संकल्प

नर्मदेश्वर महादेव धाम की स्थापना के पीछे कश्यप परिवार की गहरी आस्था और माता-पिता की स्मृति जुड़ी हुई है। चांटीडीह निवासी जितेंद्र कश्यप और उनकी पत्नी कविता कश्यप ने अपनी स्वर्गीय माता कमलाबाई कश्यप और स्वर्गीय पिता रामपाल कश्यप की मन्नत पूरी करने के उद्देश्य से मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था।परिवार ने इस धार्मिक कार्य के लिए अपनी 20 डिसमिल निजी जमीन समर्पित कर दी। इसी जमीन पर नर्मदेश्वर महादेव धाम का निर्माण कराया गया है। परिवार का कहना है कि मंदिर निर्माण उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल बनाने का कार्य नहीं है, बल्कि यह उनके माता-पिता की स्मृति को स्थायी रूप देने और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम है।

मंदिर परिसर में माता-पिता की प्रतिमाएं भी स्थापित

कश्यप परिवार ने अपने माता-पिता की स्मृति को मंदिर परिसर से जोड़ते हुए वहां उनकी प्रतिमाएं भी स्थापित की हैं। भगवान शिव की आराधना के साथ श्रद्धालु इन प्रतिमाओं के दर्शन भी कर रहे हैं।मंदिर की सेवा और व्यवस्था की जिम्मेदारी फिलहाल कश्यप परिवार ही संभाल रहा है। जितेंद्र कश्यप, उनकी पत्नी कविता कश्यप, पुत्र श्याम प्रतीक और पुत्री अंकना मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। परिवार द्वारा नियमित रूप से पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

छत की ढलाई के बाद बनेगा भव्य गुंबद

नर्मदेश्वर महादेव धाम का निर्माण कार्य अभी जारी है। मंदिर की छत की ढलाई के बाद इसके ऊपर भव्य गुंबद का निर्माण कराया जाएगा। परिवार की योजना मंदिर को और अधिक भव्य स्वरूप देने की है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक वातावरण मिल सके।सावन के महीने में हर सोमवार यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। भक्त सुबह से ही हाथों में जल, बेलपत्र और पूजा सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं। विशाल अखंड नर्मदेश्वर शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के साथ श्रद्धालु भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

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