Blog

महीने भर में 5 बंदियों की मौत,फिर भी किसी ने जानने की कोशिश नहीं की…बारीकी से हो जांच तो हो सकता है बड़ा खुलासा

बिलासपुर। सेंट्रल जेल बिलासपुर एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ चुका है। पिछले एक महीने के भीतर पांच बंदियों की मौत के बाद अब आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी राहुल उर्फ विकेश कंवर 46 ने गैसीफायर प्लांट में कूदकर आत्महत्या कर ली। इस सनसनीखेज घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की निगरानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गैसीफायर प्लांट में फंसे शव को बाहर निकालने में प्रशासन को करीब 20 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।तब कही जाकर शव को निकाला जा सका।

दरअसल बुधवार शाम करीब 4:15 बजे कैदियों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा था और गैसीफायर प्लांट चालू था। इसी दौरान जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह निवासी राहुल उर्फ विकेश कंवर अचानक प्लांट के पास पहुंचा और किसी को संभलने का मौका दिए बिना धधकती भट्ठी में कूद गया। घटना के बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
प्लांट अत्यधिक गर्म होने के कारण बुधवार शाम शव नहीं निकाला जा सका। गुरुवार सुबह एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आवश्यक उपकरण नहीं होने के कारण वह भी शव निकालने में सफल नहीं हो सकी। इसके बाद स्थानीय कबाड़ी के कर्मचारियों को बुलाया गया। उन्होंने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद गैसीफायर प्लांट को काटकर शव बाहर निकाला। पूरी कार्रवाई जेएमएफसी पोनिका यादव की मौजूदगी में हुई। मौके पर सिविल लाइन पुलिस, फोरेंसिक टीम और मृतक के परिजन मौजूद रहे। पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सिम्स भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी।


एसडीआरएफ नहीं निकाल सकी शव, कबाड़ी के कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा

गैसीफायर प्लांट के भीतर फंसे शव को निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। प्लांट अत्यधिक गर्म होने के कारण रातभर इंतजार करना पड़ा। गुरुवार सुबह एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आवश्यक उपकरण नहीं होने के कारण वह शव निकालने में सफल नहीं हो सकी। इसके बाद स्थानीय कबाड़ी के कर्मचारियों की मदद ली गई। उन्होंने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद गैसीफायर प्लांट को काटकर शव बाहर निकाला। पूरी प्रक्रिया के दौरान मजिस्ट्रेट, फोरेंसिक टीम, पुलिस और मृतक के परिजन मौके पर मौजूद रहे।


10 साल से पैरोल का इंतजार, टूट गई उम्मीद

राहुल के परिजनों के मुताबिक वह करीब 10 वर्षों से जेल में बंद था और लगातार पैरोल या छुट्टी के लिए आवेदन लगाने की बात करता था। परिवार के कुछ सदस्यों का सहयोग नहीं मिलने के कारण आवेदन आगे नहीं बढ़ पाया। इससे वह लंबे समय से मानसिक तनाव और निराशा में था। पुलिस और जेल प्रशासन इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं। आत्महत्या की वास्तविक वजह न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था राहुल

बता दे राहुल वर्ष 2014 से दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। परिजनों ने बताया कि वह लंबे समय से पैरोल या छुट्टी मिलने की उम्मीद लगाए हुए था और बार-बार आवेदन कराने की बात कहता था। परिवार के कुछ सदस्यों का सहयोग नहीं मिलने के कारण उसका आवेदन आगे नहीं बढ़ सका। बताया जा रहा है कि इसी बात से वह मानसिक रूप से परेशान और नाराज था। हालांकि आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा न्यायिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

एक महीने में पांच बंदियों की मौत, आखिर जेल में क्या हो रहा है।

बिलासपुर सेंट्रल जेल में पिछले एक महीने के भीतर पांच बंदियों की मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौतों का सिलसिला 23 जून को पॉक्सो के आरोपी नीलू जगत की जेल के भीतर हुई हत्या से शुरू हुआ। इसके बाद रायगढ़ निवासी और आजीवन कारावास की सजा काट रहे रामभरोसे माझी की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। जून माह में ही गतौरा निवासी राजू गोंड की भी जेल में मौत हुई, जबकि उससे पहले बंदी धर्मेंद्र सिंह ने भी जेल के भीतर दम तोड़ दिया। अब ताजा मामला राहुल उर्फ विकेश कंवर की आत्महत्या का सामने आया है। हत्या, बीमारी और आत्महत्या जैसी लगातार सामने आ रही घटनाओं ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की निगरानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर एक महीने के भीतर पांच-पांच मौतों के बाद भी जेल की व्यवस्था में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों की नियमानुसार जांच कराई जा रही है।


पांच मौतें,फिर भी किसी की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई

बिलासपुर सेंट्रल जेल में एक महीने के भीतर पांच बंदियों की मौत हो चुकी है। पहले जेल के भीतर हत्या, फिर बीमारी से मौतें और अब गैसीफायर में कूदकर आत्महत्या। इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद अब तक किसी अधिकारी की जवाबदेही तय किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
हर घटना के बाद जांच के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच सिर्फ मौत की वजह जानने के लिए होती है या फिर जिम्मेदारी तय करने के लिए भी।


यह जानना भी जरूरी है कि आखिर चूक कहां हुई

अगर एक ही जेल में इतने कम समय में लगातार मौतें हो रही हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि आखिर चूक कहां हुई और उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। प्रदेश में जेल विभाग की कमान डीजी, एडीजी,आईजी और डीआईजी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में होती है, जबकि स्थानीय स्तर पर जेल अधीक्षक और जेल प्रशासन सुरक्षा, निगरानी और बंदियों की देखरेख के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में पांच मौतों के बाद भी यदि किसी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई है।

वर्जन
जेल की घटना को लेकर जांच जारी है।जांच के बाद कुछ कहा जा सकता है।

खोमेश मंडावी
जेल अधीक्षक
सेंट्रल जेल बिलासपुर

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *