यूपीआई पर एमडीआर शुल्क को लेकर व्यापारियों में नाराजगी,व्यापारी बोले- फैसला वापस नहीं हुआ तो कैश पर लौटेंगे

बिलासपुर। 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लागू किए जाने के फैसले का व्यापारिक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। शुल्क के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एमडीआर शुल्क व्यापारियों पर थोपा गया है और इससे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।
देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन कैट ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर शुल्क वापस लेने की मांग की है। कैट का कहना है कि कपड़ा, किराना और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबार में व्यापारियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन 0.5% से 1% तक ही रहता है। ऐसे में 0.4% एमडीआर शुल्क लगने से उनके मुनाफे का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। संगठन ने शुल्क-मुक्त यूपीआई लेनदेन की सीमा 10,000 या 25,000 रुपए तक करने की मांग की है।
व्यापारी संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि एमडीआर शुल्क वापस नहीं लिया गया तो वे बड़े भुगतान के लिए यूपीआई के बजाय नकद या चेक का इस्तेमाल करने पर विचार करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए प्रयासों पर भी असर पड़ सकता है।
एमडीआर पर 18% जीएसटी का भी प्रावधान
व्यापारियों के मुताबिक एमडीआर एक पेमेंट सेटलमेंट सर्विस है, इसलिए इस शुल्क पर 18% जीएसटी भी लागू होगा, जिसका भुगतान व्यापारी को करना होगा। हालांकि जीएसटी पंजीकृत व्यापारी बाद में इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम कर सकते हैं।