रायपुर : बगिया क्लस्टर की समृद्धि एम-कैड योजना से 13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगी सिंचाई सुविधा…4000 किसान परिवार होंगे लाभान्वित

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई परियोजना का कार्य तेज़ी से जारी
समृद्धि की पाठशाला में किसानों को आधुनिक सिंचाई, जल प्रबंधन और कृषि नवाचारों की दी जानकारी
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में संचालित समृद्धि – कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। इसी क्रम में हर बूंद का सदुपयोग और हर खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के संकल्प के साथ कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किसानों के लिए “समृद्धि की पाठशाला” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जशपुर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पचौरी, घनश्याम पटेल, टीम लीडर एवं एरिगेशन एक्सपर्ट वैभव दाउरे, एनीटो फ्रांसिन शोभित, एफएओ के राजेश कुमार, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता जे के नेताम, मुख्य अभियंता अनिल खलको, एम कैड के स्टेट नोडल आफिसर आलोक अग्रवाल, परियोजना निदेश संजय पाठक, कार्यपालन अभियंता अखिलेश साहू एवं विनोद भगत, एसडीओ कुर्रे, सतीश मिश्रा, रूपेश कश्यप, सलाहकार सतीश सराफ एवं विजय खरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, वाटर यूजर सोसायटी के सचिव नेहा गुप्ता एवं सदस्य तथा जनप्रतिनिधि, 13 ग्राम पंचायतों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने कहा कि यह परियोजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। इसके माध्यम से सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने से किसान खरीफ के साथ रबी एवं अन्य फसलें भी आसानी से ले सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि बगिया क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हुई है।

मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की बधाई देते हुये किसानों एवं महिलाओं को इस योजना का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जल संरक्षण और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से योजना का अधिकतम लाभ उठाने और बगिया को देश के लिए जल प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल बनाने का आह्वान किया।

समृद्धि की पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली एवं जल प्रबंधन की जानकारी देना
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि “समृद्धि की पाठशाला” का उद्देश्य किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली एवं जल प्रबंधन की जानकारी देना है। उन्होंने बताया कि परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जशपुर के किसानों को मध्यप्रदेश के मोहनपुरा-कुंडलिया सिंचाई मॉडल का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। उन्होंने बताया कि इस योजना में जमीन के भीतर पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रहेगी।

एम-केड योजना देशभर के 38 क्लस्टरों में पायलट परियोजना के रूप में लागू की जा रही
जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पचौरी ने बताया कि एम-केड योजना देशभर के 38 क्लस्टरों में पायलट परियोजना के रूप में लागू की जा रही है, जिनमें बगिया क्लस्टर भी शामिल हैं। परियोजना तीन प्रमुख आधारों पर आधारित है – भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाना, जल प्रबंधन समितियों के जरिए संचालन एवं रखरखाव तथा किसानों की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से जल वितरण। इससे किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे और दो से तीन फसलें लेकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से सिंचाई अधिक दक्ष होगी, कृषि उत्पादन में 15 से–30 प्रतिशत तक वृद्धि, वर्ष में दो से तीन फसलें लेने की संभावना तथा सिंचाई लागत में कमी आएगी। साथ ही उद्यानिकी एवं नकदी फसलों को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

महिलाओं की सहभागिता से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, खेती की उत्पादकता तथा गाँव का समग्र विकास सुनिश्चित
जल उपयोगकर्ता समिति की सचिव नेहा गुप्ता ने मध्यप्रदेश की मोहनपुरा–कुंडलिया परियोजना के भ्रमण का अनुभव साझा करते हुए किसानों एवं विशेष रूप से महिलाओं से जल प्रबंधन और कृषि गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, खेती की उत्पादकता तथा गाँव का समग्र विकास सुनिश्चित होता है।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि जल उपयोगकर्ता समिति सभी किसानों के सहयोग से सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगी, पानी की प्रत्येक बूंद का सदुपयोग करेगी तथा योजना का लाभ प्रत्येक किसान तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास करेगी।
योजना के तहत अगले पांच वर्षों तक किसानों को प्रशिक्षण
एफएओ के राजेश कुमार ने योजना की सफलता के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत अगले पांच वर्षों तक किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और हर प्रकार का आवश्यक समर्थन प्रदान किया जाएगा।
13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गत 01 मई को अपने गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में समृद्धि एम-कैड योजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था। लगभग 119 करोड़ रुपये की इस परियोजना में भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली से सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी
परियोजना के अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, दोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के कुल 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ एवं 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी, इस प्रकार कुल 9866 हेक्टेयर सिंचाई को इस योजना के तहत आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली से सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी।

आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित जल प्रबंधन लागू किया जाएगा
जल प्रबंधन
समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि बगिया क्लस्टर परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, लगभग 500 किलोमीटर लंबा प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क, SCADA एवं IoT जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित जल प्रबंधन लागू किया जाएगा, जिससे किसानों को आवश्यकता के अनुसार समय पर सिंचाई जल उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि परियोजना का संचालन एवं रखरखाव प्रारंभिक पाँच वर्षों तक निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी जल उपयोगकर्ता समिति को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि समृद्धि एम-केड योजना का उद्देश्य पानी की प्रत्येक बूंद का प्रभावी उपयोग, कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि तथा जशपुर को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एम-केड पैटर्न को अपनाया है, जिसे केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल के रूप में सराहा है।

किसानों ने सीएम के प्रति जताया आभार
किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
खुले सत्र में किसानों ने सिंचाई प्रबंधन एवं योजना से जुड़े विभिन्न प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बगिया क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और नई योजना से कृषि को नई गति मिलेगी।
“अब पानी खेत ढूंढेगा, किसान नहीं” तथा “हर बूंद का सही उपयोग, हर खेत तक सही पानी” के संदेश के साथ किसानों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के बीच “समृद्धि की पाठशाला” कार्यक्रम का समापन हुआ।