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रेल हादसा के 20 दिन बाद भी पीड़ित परिवार भटकने को मजबूर….

नेताओं की संवेदनाएं खत्म,पीड़ितों की सुनवाई कब..

20 दिन बाद भी न इलाज में सुधार, न मृतक का प्रमाणपत्र,प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर


बिलासपुर । लालखदान रेल हादसे के बाद नेताओं और अधिकारियों ने संवेदनाएं तो खूब जताईं, लेकिन 20 दिन बाद भी हालात यह है कि पीड़ित परिवार अपने मृतक और घायल सदस्य की जानकारी के लिए भटक रहे है। सवाल यह है कि हादसे के पीड़ितों की सुध लेने वाला अब कोई क्यों नहीं है।

दरअसल यह दर्द भरी कहानी है बिल्हा निवासी 65 वर्षीय तुलाराम अग्रवाल और उनके परिवार की। तुलाराम 4 नवंबर को अपने बेटे 35 वर्षीय अंकित अग्रवाल के साथ नैला से लौट रहे थे। लालखदान ओवरब्रिज के पास हुई भीषण रेल दुर्घटना में अंकित की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तुलाराम को गंभीर चोटों के साथ एलाइट हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया।20 दिन बीत गए, लेकिन उनकी बेटी मोना अग्रवाल की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। मोना का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन उनके पिता की सेहत को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा। कभी सिर में पानी भरने की बात, कभी पैर में सूजन, कभी रक्तस्राव  कुल मिलाकर हालत जस की तस। उनका कहना है कि जब सुधार नहीं है तो मरीज को हायर सेंटर भेजा जाए। वही मोना ने अपनी दर्द भरी बातों के साथ कहा कि आज तक उन्हें न उनके भाई की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली है,न मृत्यु प्रमाण पत्र। जिला अस्पताल, नगर निगम, तहसील, थाना…हर जगह चक्कर, लेकिन समाधान कहीं नहीं। वे अकेली हैं।पिता की सेवा करें या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाएँ, सबसे बड़ा सवाल यही क्या हादसे के पीड़ितों की सुनवाई सिर्फ बयानबाज़ी तक ही सीमित हैl

*लालखदान हादसे में मौत,अस्पताल और विभागों की टालमटोल से परिवार त्रस्त*

पीड़ित मोना अग्रवाल का कहना है कि रेलवे के अधिकारी भी इसमें पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे है।बल्कि न मदद कर रहे है और न ही किसी तरह की कोई 
जानकारी दे रहे है जिसके कारण भटकना पड़ रहा है।जबकि रेल हादसे के बाद रेलवे के अफसरों ने बड़े बड़े दावे और वायदे किए थे कि इलाज से लेकर हर संभव मदद किया जायेगा।लेकिन जैसे जैसे दिन बीतता गया रेलवे प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटता गया है।

*मोना बोली,होनी चाहिए बड़े अस्पताल में  इलाज*

पीड़ित मोना का कहना है कि जब यहां पर इलाज सही तरीके से नहीं हों रहा है तो किसी बड़े अस्पताल के इलाज करवाना चाहिए और बाहर भेजना चाहिए।झूठे वायदे करके किसी की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

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