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वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण से लगभग पूरा प्रदेश जूझ रहा

बिलासपुर- गंभीर हैं ग्रीन बेल्ट के विकास को लेकर लेकिन प्रजाति चयन को लेकर जैसी लापरवाहियां औद्योगिक ईकाइयां दिखा रहीं हैं, उससे वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण से लगभग पूरा प्रदेश जूझ रहा है।

प्रदूषण अब स्थायी समस्या बन चुकी है। कारणों की खोज-खबर लेने के प्रयास में वानिकी वैज्ञानिकों को जो जानकारियां मिलीं हैं वह चौंकाने वाली इसलिए मानी जा रहीं हैं क्योंकि रोपण में स्थानीय प्रजातियों की बजाए ऐसी प्रजातियां चुनी गई हैं, जो प्रदूषण रोकने में सक्षम नहीं हैं।


पालन नहीं इन निर्देशों का

अनिवार्य है ग्रीन बेल्ट का बनाया जाना। कई पंक्तियों में पौध रोपण जरूरी है। रोपण किए जा रहे पौधों के जीवित रहने की दर 80% अधिक होना चाहिए। यह ध्यान परिसर और खनन क्षेत्र दोनों में रखना होगा। स्थानीय प्रजातियों के चयन और रोपण के सख्त निर्देश इसलिए दिए जाते हैं क्योंकि सुझाई गई स्थानीय प्रजातियां हर प्रकार के प्रदूषण रोकने में सक्षम हैं। यह खुलासा वानिकी वैज्ञानिकों के अनुसंधान में पहले ही हो चुका है।


प्रदूषण के अनुसार रोपण

धूल वाले क्षेत्र के लिए घनी पत्तियों वाली प्रजातियों के पौधों का रोपण। गैस प्रदूषण वाले क्षेत्रों में सहनशील प्रजातियां अपेक्षित परिणाम देतीं हैं। ध्वनि प्रदूषण आम हो चला है। इसलिए ऐसे क्षेत्रों में भी घनी पत्तियों वाले प्रजाति का रोपण ग्रीन बेल्ट के रूप में करना अनिवार्य है। क्योंकि इनसे ध्वनि का फैलाव सीमित दायरे में ही सिमटा रहेगा। यह व्यवस्था खनन, उत्पादन और पूरे परिवहन क्षेत्र में करने के कड़े निर्देश हैं।


यह प्रदूषण और यह प्रजाति

प्रदेश की जलवायु के अनुसार नीम, करंज, शीशम, अमलतास, पेल्टाफॉर्म और गुलमोहर को धूल सहन करने वाला माना गया है। जबकि खनन क्षेत्र के लिए बबूल, सुबबूल, शीशम, कैसिया सियामिया और सफेदा जैसी प्रजातियों के रोपण के निर्देश हैं। पीपल, बरगद और अर्जुन जैसी प्रजातियों की पहचान शुद्ध वायु देने वाले वृक्षों के रूप में हैं। मिश्रित प्रजातियों के पौधों का रोपण सबसे ज्यादा कारगर माना गया है। प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रोपण की मानक दूरी 5 से 25 किलो मीटर होनी चाहिए ।

वर्जन
ग्रीन बेल्ट प्रभावी जैव-रक्षात्मक तंत्र

ग्रीन बेल्ट केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित किया जाने वाला एक प्रभावी जैव-रक्षात्मक तंत्र है। यदि इसमें स्थानीय एवं प्रदूषण-सहनशील प्रजातियों का समुचित चयन नहीं किया गया, तो ग्रीन बेल्ट अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी।इसलिए मिश्रित प्रजातियों का चयन और बहु-स्तरीय रोपण प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाना ही प्रदूषण नियंत्रण का स्थायी और प्रभावी समाधान है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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