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हत्या के फरार कैदी ने जहर खाकर दी जान की बाज़ी, जेल और पुलिस प्रशासन की खुली पोल…..इधर जिला प्रशासन ने जारी की फरार कैदी के करतूतों की डिटेल

सरेंडर के बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी, गंभीर लापरवाही से कैदी की हालत नाजुक

बिलासपुर । पुलिस और केंद्रीय जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा और फरवरी 2025 से अंबिकापुर जेल से फरार कैदी मुकेश कांत आत्मसमर्पण के बाद भी गिरफ्तारी से बच निकला। मंगलवार को मुकेश कांत ने कलेक्टर के सामने खुद सरेंडर किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे केंद्रीय जेल भेजा, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जेल प्रशासन ने महज औपचारिक पूछताछ के बाद उसे थाने के बाहर ही छोड़ दिया। इसके बाद मुकेश अपने परिवार वालों के साथ घर चला गया। इस लापरवाही की पोल तब खुली जब बुधवार को अंबिकापुर पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची, लेकिन गिरफ्तारी से ठीक पहले मुकेश ने ज़हर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे गंभीर अवस्था में सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। मुकेश कांत को 2013 में हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और वह पिछले कई महीनों से फरार चल रहा था। लेकिन जब वह खुद कानून के हवाले हुआ, तब भी जेल प्रबंधन और पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। यह घटना न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह संवेदनशील मामलों में भी प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। पूरे मामले को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है।

कलेक्टर कार्यालय से निकलकर खाया जहर

सरेंडर करने पहुंचे आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी ने अंबिकापुर जेल के अधिकारियों और कैदियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया हैं और उसके बाद जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की है।कैदी के परिजनो ने बताया कि वह काफी प्रताड़ित है जेल में मारपीट करते हैं और पैसे की मांग करते है।

राज्य सरकार और प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

परिजनों ने न्याय की गुहार कलेक्टर को ज्ञापन देकर की है।परिजनों के सीधे कहा है कि इसमें प्रशासन और सरकार मदद करे नहीं तो जेल में कुछ भी हो सकता है।जेल की प्रताड़ना से तंग आकर ही इलाज के नाम पर फरार हुए थे।

जिला प्रशासन ने जेल से फरार हुए कैदी के खिलाफ जारी किया प्रेस विज्ञप्ति

  • हत्या के आरोप में बंदी मुकेश कांत (उम्र 41 वर्ष) वर्ष 2011 से सजा काट रहा है। वर्ष 2020 में वह पैरोल से फरार हो गया था एवं 3 साल बाद वर्ष 2023 में पकड़ा गया था।
  • बिलासपुर जेल में वह रंगदारी और दूसरे कैदियों से मारपीट करता था जिसके कारण जनवरी 2024 में उसे अंबिकापुर जेल में स्थान्तरित किया गया था।
  • जेल में रहने की अवधि के दौरान उस पर लगातार जेल अपराध कायम हुए हैं।
  • दिनांक 04.10.25 को तबियत खराब होने की शिकायत पर उसे पुलिस गार्ड के साथ अंबिकापुर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दिनांक 06.10.25 को वह पुलिस गार्ड को चकमा देकर अम्बिकापुर अस्पताल से फरार हो गया।
  • अंबिकापुर पुलिस उसे ढूंढ रही थी, इस बीच दिनांक 07.10.25 को उसने बिलासपुर कलेक्टर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दिनांक 08.10.25 को जब अंबिकापुर पुलिस उसे गिरफ्तार करने बिलासपुर आई तो कथित रूप से सैनिटाइजर और दर्द निवारक गोलियों को खाने की बात कहकर वह सिम्स, बिलासपुर में भर्ती हो गया।
  • येन केन प्रकरेण वह बिलासपुर जेल में ही रहना चाहता है। बिलासपुर में उसका घर है।
  • उसकी पत्नी ने अम्बिकापुर जेल स्टाफ पर पैसे लेने और प्रताड़ना के आरोप लगाए है, जिसकी जांच श्री एस एस तिग्गा, डीआईजी जेल कर रहे हैं।
  • अम्बिकापुर अस्पताल से बंदी मुकेश कांत के फरार होने के प्रकरण में आरक्षक मदन पैकरा को पुलिस अधीक्षक, सरगुजा ने निलंबित किया है। बंदी अभी सिम्स बिलासपुर अस्पताल में है, जिसे आज वापिस अम्बिकापुर ले जाकर जेल दाखिल करवाया जाएगा।
  • बंदी मुकेश कांत को अन्य जेल स्थानान्तरित करने का आदेश आज जारी किया जाएगा।

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