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समर स्पेशल ट्रेन की एसी फेल होने से मचा बवाल, आठ घंटे तक गर्मी झेलने के बाद यात्रियों ने मचाया हंगामा,रोकी ट्रेन

बिलासपुर। गोंदिया-रक्सौल समर स्पेशल ट्रेन में एसी फेल होने पर शनिवार को बिलासपुर स्टेशन में जमकर हंगामा हुआ। बी1 और बी2 कोच में कूलिंग नहीं होने से नाराज यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। जांच में सामने आया कि कोच की बैटरी चार्ज नहीं थी। रेलवे ने लिखित आश्वासन और दो मैकेनिक साथ भेजने के बाद करीब 2 घंटे बाद ट्रेन रवाना की।

शनिवार सुबह 6.30 बजे गोंदिया से रवाना हुई समर स्पेशल ट्रेन के एसी थ्री के बी1 और बी2 कोच में कुछ ही देर बाद कूलिंग की समस्या शुरू हो गई। यात्रियों ने डोंगरगढ़, राजनांदगांव और दुर्ग में शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें आगे ठीक होने का भरोसा दिया गया। ट्रेन रायपुर और भाटापारा होते हुए दोपहर करीब 2.40 बजे बिलासपुर पहुंची। 8 घंटे तक परेशानी झेलने के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ट्रेन रुकते ही एसी कोच के यात्री नीचे उतर आए और हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ यात्रियों ने पानी की कमी की भी शिकायत की। पानी भरने के बाद जैसे ही ट्रेन आगे बढ़ने लगी, यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। आरपीएफ और स्टेशन स्टाफ के पहुंचने पर पता चला कि एसी पूरी तरह बंद है, इसलिए यात्री आगे जाने को तैयार नहीं हैं। करीब आधे घंटे बाद स्टेशन प्रबंधन सक्रिय हुआ और मैकेनिकल स्टाफ को बुलाया गया। जांच में सामने आया कि कोच की बैटरी चार्ज नहीं थी, जिसके कारण एसी काम नहीं कर रहा था। मौके पर डायरेक्ट करंट से चार्जिंग कर कूलिंग शुरू की गई। अधिकारियों ने बताया कि चलती ट्रेन में बैटरी चार्ज होती रहेगी और समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन यात्री लिखित आश्वासन और मैकेनिक साथ भेजने की मांग पर अड़े रहे। लंबे विवाद के बाद रेलवे ने दो मैकेनिक ट्रेन में भेजने और समस्या नहीं आने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ट्रेन शाम 4.30 बजे बिलासपुर से रवाना हुई। ट्रेन पहले से 3 घंटे लेट थी, जो यहां 2 घंटे और रुकने से कुल 5 घंटे लेट हो गई।

दूरंतो के यात्रियों ने भी किया था हंगामा:–

शुक्रवार की शाम को पुणे से हावड़ा जाने वाली दूरंतो एक्सप्रेस भी 3 नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची। उसके एक एसी कोच में कूलिंग कम होने की शिकायत पहले से स्टेशन मास्टर तक पहुंच चुकी ​थी इसलिए एसी मैकेनिकों को वहां पर तैनात रखा गया था। जैसे ही ट्रेन पहुंची मैकेनिकों ने एसी को सुधार दिया।जब कूलिंग सही होने लगी तब ट्रेन आगे रवाना की गई हालांकि इस काम के लिए ट्रेन को सिर्फ 10 मिनट ही रोकना पड़ा था।

मेंटेनेंस निजी हाथों में देने का नतीजा:–

कोच और एसी मेंटेनेंस का पूरा काम रेलवे प्रशासन ने ठेके पर दे दिया है। ठेकेदारों की मनमानी चल रही है इसलिए गोंदिया से रक्सौल तक भेजे जाने वाली रैक के एसी की बैटरी को चार्ज ही नहीं किया गया। जबकि इसे पूरी तरह से चार्ज करने के बाद रैक को ओके दिया जाना था। बैटरी को पूरी तरह से चार्ज होने में 4 घंटे से ज्यादा समय लगता है।

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