सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से ऑनलाइन कराने का आरोप: खुद पर सवाल तो SDM, तहसीलदार और कलेक्टर को ही भेज दिया कोर्ट नोटिस – कमल लाल निराला का कारनामा उजागर

महेंद्र सिंह राय बिलासपुर । जिले के -ग्राम पंचायत केवटाडीह टांगर मस्तूरी क्षेत्र से राजस्व विभाग से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। आरोप है कि स्वर्गीय बाबूलाल पुत्र कमल लाल निराला नामक व्यक्ति ने शासकीय भूमि खसरा नंबर 31/ 3 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन अपने पिता बाबूलाल पिता पंचराम ग्राम पंचायत केवटाडीह टांगर निवासी के नाम पर दर्ज करवा लिया है।
जब राजस्व अमले ने जांच शुरू की तो सच्चाई छुपाने के लिए उसी व्यक्ति ने उल्टा प्रशासन को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
कोर्ट में अपील कर अधिकारियों को बनाया पक्षकार
प्राप्त न्यायालयीन नोटिस (नोटिस फोटो संलग्न) के अनुसार –
न्यायालय श्रीमान दशम जिला न्यायाधीश, बिलासपुर (छ.ग.)
व्य.अ.प्र.क्र. – 61P / 2024
आदेश दिनांक – 25/07/2026
पेशी दिनांक – 23/09/2026
कमल लाल निराला (अपीलार्थी) ने व्यवहार अपील अंतर्गत
- छ.ग. शासन द्वारा जिलाध्यक्ष / कलेक्टर महोदय, बिलासपुर
- श्रीमान तहसीलदार महोदय, मस्तूरी
- श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी (रा.) मस्तूरी
को ही उत्तरवादी बना दिया है और समाचार पत्र प्रकाशन के माध्यम से नोटिस प्रेषित कराया जा रहा है।
फर्जीवाड़ा खुद, नोटिस दूसरों को
स्थानीय सूत्रों और राजस्व सूत्रों का कहना है कि जिस सरकारी जमीन को कमल लाल निराला ने अपने पिता बाबूलाल पिता पंचराम के नाम पर ऑनलाइन चढ़वाया है, उसके मूल रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है। नियमानुसार सरकारी भूमि का निजीकरण नहीं हो सकता, लेकिन फर्जी तरीके से ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम जोड़कर कब्जा करने की कोशिश की गई।
अब जब तहसीलदार और SDM कार्यालय ने इस पर आपत्ति ली तो खुद को बचाने के लिए अपीलार्थी ने कलेक्टर, SDM और तहसीलदार को ही कोर्ट में घसीट दिया।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना गलत – ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि SDM मस्तूरी और तहसीलदार मस्तूरी द्वारा शासकीय जमीन को बचाने के लिए नियमानुसार कार्य किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें ही नोटिस देकर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सरकारी जमीन खसरा नंबर 31/3 बड़े झाड़ जंगल जमीन के फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा होने की संभावना है।
प्रशासन के नियमानुसार कार्य करने वाले अधिकारियों के साथ खड़ा है और मांग करता है कि फर्जी तरीके से सरकारी जमीन ऑनलाइन कराने वालों की जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।*