यूजीसी नियमों की अनदेखी, विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में
अटल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर (कामर्स) की नियुक्ति हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय से बाधित रहेगी।
बिना सत्यापन के साक्षात्कार की अनुमति, आवेदक ने दी न्यायालय में चुनौती
विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही उजागर, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
बिलासपुर:
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में प्रोफेसर (कामर्स) के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया उच्च न्यायालय के आदेश से बाधित हो गई है। विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त किए गए उम्मीदवार की वैधता अब न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी। आवेदक डा. राजेश कुमार शुक्ला ने विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी रेगुलेशन 2018 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अर्हता प्राप्त न करने वाले आवेदकों को त्रुटिपूर्ण सत्यापन के आधार पर साक्षात्कार के लिए योग्य घोषित किया, जो नियमों के खिलाफ है। इस मामले में 21 मार्च 2025 को हुई सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया और चयनित उम्मीदवार की वैधता को अपने अंतिम निर्णय तक रोक दिया है।
यूजीसी रेगुलेशन 2018 का उल्लंघन-
प्राध्यापक पद के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2018 में स्पष्ट नियम निर्धारित हैं।
अनुभव की पात्रता: यूजीसी के अनुसार, किसी असिस्टेंट प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर का प्रोफेसर पद के लिए आवेदन तभी मान्य होगा, जब उसका कुल मासिक वेतन 7वें वेतनमान में नियुक्त सहायक प्राध्यापक या सह-प्राध्यापक के वेतन से कम न हो। वर्तमान में 7वें वेतनमान के अनुसार सहायक प्राध्यापक का कुल वेतन ₹1,30,000/- से अधिक होना चाहिए। सत्यापन के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आइटीआर) या फार्म-16 की जांच आवश्यक है।
संवैधानिक चयन समिति की शर्त:
यदि कोई आवेदक निजी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय से है, तो उसका शैक्षणिक अनुभव तभी मान्य होगा जब उसकी नियुक्ति संवैधानिक चयन समिति के माध्यम से हुई हो।
विश्वविद्यालय की लापरवाही उजागर-
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 10 फरवरी 2025 को आवेदकों को अपने संवैधानिक नियुक्ति पत्र और पिछले 10 वर्षों के आइटीआर / फार्म-16 जमा करने का निर्देश दिया था। आवेदकों को 17 फरवरी 2025 की शाम 5 बजे तक कुलसचिव के ईमेल पर दस्तावेज भेजने का समय दिया गया। हालांकि, 6 मार्च 2025 को बिना उचित जांच किए सभी नौ आवेदकों को साक्षात्कार के लिए योग्य घोषित कर दिया गया।
न्यायालय में दी चुनौती-
त्रुटिपूर्ण सत्यापन के खिलाफ 8 मार्च 2025 को डा. राजेश कुमार शुक्ला ने कुलसचिव को लिखित आपत्ति और ईमेल भेजकर इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी आपत्ति को अनदेखा करते हुए 22 मार्च 2025 को साक्षात्कार आयोजित करने की घोषणा कर दी। इससे असंतुष्ट होकर डा. शुक्ला ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसके बाद न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अब इस मामले की अंतिम वैधता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी।