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तीन पीढ़ियों से निवासरत आदिवासी परिवारों के दावों का सत्यापन कर उन्हें वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया जाए

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस ट्रस्ट भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में वन अधिकार, आदिवासी बेदखली, हसदेव अरण्य संरक्षण एवं तालाबों पर अतिक्रमण जैसे गंभीर मुद्दों को सामाजिक कार्यकर्ता जे पी देवांगन न प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, जिला बिलासपुर के कोटा क्षेत्र अंतर्गत तेंदुआ वन कक्ष क्रमांक 130 सहित पाली ब्लॉक के ग्राम बर्धेया, रानीगांव तथा कोरबा जिले के कारीशापर में तीन पीढ़ियों से निवासरत आदिवासी परिवारों के दावों का सत्यापन कर उन्हें वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया जाना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि वन भूमि दावा सत्यापन के दौरान पात्र हितग्राहियों को आधार कार्ड, राशन कार्ड, शपथ पत्र, जुर्माना रसीद, न्यायालयीन आदेश एवं ग्राम के बुजुर्गों के कथन सहित सभी मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए तथा जब तक दावे खारिज नहीं हो जाते, तब तक बेदखली की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि 13 सितंबर 2024 को झोपड़ियों को तोड़ा गया तथा 6 नवंबर 2024 को 36 आदिवासी परिवारों के आवास जला दिए गए। इस मामले में वन विकास निगम के संबंधित अधिकारियों एवं सहयोगियों पर एसटी-एसटी एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई एवं गिरफ्तारी की मांग की गई।
उन्होंने आगे कहा कि National Green Tribunal के आदेशानुसार छत्तीसगढ़ के 22 तालाबों, विशेषकर बलौदा नगर पंचायत के 14 तालाबों से अतिक्रमण हटाया जाना है, किंतु अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। नगर पंचायत द्वारा तालाब की भूमि पर कॉम्प्लेक्स निर्माण कर उसे किराये पर दिए जाने को गंभीर अनियमितता बताते हुए उन्होंने तत्काल कार्रवाई तथा तालाबों को उनके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की।

इसके साथ ही उन्होंने हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के लिए हो रही जंगल कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की, ताकि जल स्रोतों, खेती और स्थानीय आजीविका को सुरक्षित रखा जा सके।

अंत में उन्होंने कहा कि “कानून का पालन करते हुए आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।”

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