जिला पंचायत सीईओ पर दोषियों को बचाने का आरोप….सचिव निलंबन के खिलाफ चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

3 दिन का अल्टीमेटम—निलंबन वापसी नहीं तो पंचायत व्यवस्था पूरी तरह ठप,
जनपद में तालाबंदी तय
बिलासपुर /जीपीएम/जिले में जनपद पंचायत गौरेला अंतर्गत 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। ₹1.19 करोड़ से अधिक के भुगतान में गड़बड़ी के आरोपों के बाद 8 पंचायत सचिवों को निलंबित किए जाने से आक्रोश भड़क गया है।
इस कार्रवाई के विरोध में अब सरपंच संघ और सचिव संघ एकजुट हो गए हैं और जिला प्रशासन के खिलाफ खुली लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आंदोलन की रूपरेखा में चक्का जाम, जनपद पंचायत में तालाबंदी और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे सख्त कदम शामिल हैं, जिससे पूरे जिले की पंचायत व्यवस्था के ठप होने का खतरा बन गया है। संघ का आरोप है कि पूरे मामले में वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
सरपंच संघ के गौरेला अध्यक्ष तूफान सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पंचायत में पैसों की कथित चोरी की जानकारी खुद सरपंचों और सचिवों ने दी थी। थाने में सूचना दी गई, अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन जांच करने के बजाय उन्हीं लोगों को आरोपी बना दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने करोड़ों रुपये का गड़बड़झाला किया, उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष लालचंद सोनवानी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह विधि के विरुद्ध बताया। उनका कहना है कि इस मामले के मुख्य आरोपी—वेंडर, कंप्यूटर ऑपरेटर और तत्कालीन सीईओ—अब तक कार्रवाई से बाहर हैं, जबकि निर्दोष सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने सीधे तौर पर जिला पंचायत सीईओ पर आरोप लगाया कि वे दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और पूरी कार्रवाई को एकतरफा बनाया गया है।
सचिव संघ के जिला अध्यक्ष किशन राठौर ने भी प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे सचिवों को भी निलंबित कर दिया गया है, जो उस समय संबंधित पंचायतों में पदस्थ ही नहीं थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिना ठोस जांच के ही कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सीईओ को बचाने के लिए पूरी कहानी गढ़ी जा रही है।
कई मामलों में बिना किसी वास्तविक सप्लाई के ही भुगतान कर दिया गया
संघ ने यह भी दावा किया कि 15वें वित्त आयोग की राशि का संचालन और भुगतान प्रक्रिया जनपद स्तर से नियंत्रित थी, जहां से वेंडर फर्मों के खातों में बड़ी राशि ट्रांसफर की गई। आरोप है कि कई मामलों में बिना किसी वास्तविक सप्लाई के ही भुगतान कर दिया गया, लेकिन अब तक न तो संबंधित वेंडरों पर कार्रवाई हुई है और न ही किसी बड़े अधिकारी पर एफआईआर दर्ज की गई है।इसी के विरोध में अब सरपंच और सचिव संघ ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है।
जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर 3 दिन का दिया अल्टीमेटम
सोमवार को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर 3 दिन का अल्टीमेटम दिया जाएगा। यदि इस दौरान निलंबन वापस नहीं लिया गया और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन उग्र रूप लेगा। संघ की रणनीति के अनुसार, सबसे पहले सेमरा तिराहा के मुख्य मार्ग पर चक्का जाम किया जाएगा, जिससे जिले की यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी। इसके साथ ही गौरेला जनपद पंचायत में तालाबंदी कर प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
सरपंच और सचिव एकजुट होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे
इतना ही नहीं, पूरे जिले के सरपंच और सचिव एकजुट होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां पंचायतों के माध्यम से संचालित सभी कार्य—जैसे विकास योजनाएं, मजदूरी भुगतान, निर्माण कार्य, प्रमाण पत्र, शासकीय योजनाओं का संचालन पूरी तरह ठप हो जाएंगे।इससे न सिर्फ आम ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी चरमरा सकती है।
निर्दोष सचिवों को बहाल किया जाए और वास्तविक दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अब आर-पार की लड़ाई है—या तो निर्दोष सचिवों को बहाल किया जाए और वास्तविक दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, या फिर पूरा जिला आंदोलन की चपेट में आकर ठहर जाएगा।