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अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है” — 15 वें वित्त घोटाले पर फूटा जनाक्रोश,सरपंच-सचिव सड़कों पर,होगा उग्र आंदोलन

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
जनपद पंचायत गौरेला में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित करोड़ों रुपये के OTP घोटाले को लेकर अब हालात विस्फोटक हो गए हैं। लंबे समय से ठोस कार्रवाई नहीं होने और एकतरफा निर्णयों के आरोपों के बीच सरपंच संघ और सचिव संघ ने संयुक्त रूप से आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। सैकड़ों की संख्या में सरपंच और सचिव सड़कों पर उतर आए और “अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है” जैसे नारों से पूरे शहर का माहौल गरमा दिया।


रैली और प्रदर्शन से गूंजा शहर
जिलेभर से पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय का रुख किया। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान भारी जनसैलाब देखने को मिला, जिससे प्रशासनिक हलचल तेज हो गई।

5 बिंदुओं का ज्ञापन, उच्चस्तरीय जांच की मांग

रैली के बाद प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार गौरेला को 5 बिंदुओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 15वें वित्त की राशि के ट्रांसफर से जुड़ी सभी फाइलों की जांच हो, भुगतान पाने वाले वेंडरों, किए गए कार्यों और सामग्री आपूर्ति की सत्यता की जांच कर वास्तविक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

OTP और सिस्टम में गड़बड़ी का आरोप
संघ ने गंभीर आरोप लगाया कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में सरपंच और सचिवों के मोबाइल नंबर की जगह कंप्यूटर ऑपरेटर का नंबर दर्ज कर दिया गया था। इसके चलते सभी भुगतान से जुड़े OTP ऑपरेटर को प्राप्त होते रहे और कथित रूप से बिना पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी के बड़े पैमाने पर लेनदेन किए गए।

“बिना काम करोड़ों का भुगतान”
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई मामलों में बिना किसी कार्य या सामग्री आपूर्ति के ही लाखों-करोड़ों रुपये वेंडरों को भुगतान कर दिए गए। इसके बावजूद अब तक न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी, ऑपरेटर या वेंडर पर ठोस कार्रवाई की गई है।

सचिवों पर कार्रवाई, असली आरोपी बाहर?
मामले में 8 सचिवों के निलंबन से विवाद और गहरा गया है। संघ का आरोप है कि पंचायत स्तर के सरपंच और सचिवों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार—अधिकारी, ऑपरेटर और वेंडर—अब भी कार्रवाई से बाहर हैं।
DSC और अप्रूवल प्रक्रिया पर सवाल
डिजिटल सिग्नेचर (DSC) की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ का कहना है कि जब डीएससी का अप्रूवल जनपद स्तर से होता है, तो अन्य पंचायतों के डीएससी से भुगतान होना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

खाते सील, विकास कार्य ठप
प्रशासन द्वारा 8 ग्राम पंचायतों के बैंक खाते सील कर दिए गए हैं, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। संघ ने इसे निर्दोष पंचायतों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है।

नेताओं के तीखे आरोप
जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष लालचंद सोनवानी ने कार्रवाई को विधि के विरुद्ध बताते हुए कहा कि मुख्य आरोपी—वेंडर, कंप्यूटर ऑपरेटर और तत्कालीन सीईओ—अब तक बचाए जा रहे हैं, जबकि निर्दोष सचिवों को निलंबित किया गया है। उन्होंने जिला पंचायत सीईओ पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई एकतरफा की गई है।

वहीं सचिव संघ के जिला अध्यक्ष किशन राठौर ने कहा कि कुछ ऐसे सचिवों पर भी कार्रवाई की गई है, जो उस समय संबंधित पंचायतों में पदस्थ ही नहीं थे। उन्होंने इसे बिना जांच की गई कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन सीईओ को बचाने के लिए पूरी कहानी गढ़ी जा रही है।

तहसीलदार का आश्वासन
तहसीलदार गौरेला ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए कहा कि सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया है और जांच के लिए उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

3 दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर निलंबित सचिवों को बहाल नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो 26 मार्च 2026 से जिलेभर में “काम बंद-कलम बंद” हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
आगे की रणनीति भी तय कर दी गई है—
30 मार्च: जनपद पंचायत गौरेला में ताला बंदी
31 मार्च: सेमरा तिराहा में चक्का जाम
संघ ने स्पष्ट कहा है कि यह आंदोलन की शुरुआत है और जब तक निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी।
अब पूरा मामला जिले में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस अल्टीमेटम पर क्या कदम उठाता है और क्या इस बहुचर्चित घोटाले में सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।

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