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स्टे के बावजूद सुनवाई करने वाले जज के आदेश रद्द, स्पष्टीकरण तलब, फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त किया गया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर ने एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाते हुए फैमिली कोर्ट रायगढ़ द्वारा पारित आदेशों को निरस्त कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने पारित किया है। मामले में याचिकाकर्ता ने सिविल सूट (परिवारिक विवाद) को रायगढ़ फैमिली कोर्ट से अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कोर्ट स्टाफ और प्रतिवादी की मिलीभगत से कार्यवाही प्रभावित हो रही है, लगातार छोटी-छोटी तारीखें दी जा रही हैं और याचिकाकर्ता के दस्तावेजों में देरी की जा रही है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह उत्पन्न हुआ।

स्टे के बावजूद सुनवाई जारी रखने पर हाईकोर्ट की नाराजगी-

हाईकोर्ट ने 10 मार्च 2026 को अंतरिम आदेश पारित कर सिविल सूट की कार्यवाही पर रोक (स्टे) लगा दी थी। इसके बावजूद फैमिली कोर्ट के प्रेसीडिंग ऑफिसर ने उसी दिन और 12 मार्च को भी मामले की सुनवाई की और आदेश पारित कर दिए। कोर्ट ने पाया कि संबंधित जज को स्टे आदेश की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने न केवल आवेदन पर आदेश पारित किया, बल्कि भरण-पोषण राशि को लेकर याचिकाकर्ता के खिलाफ टिप्पणियां भी कीं।

हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश-

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, जब किसी उच्च न्यायालय द्वारा कार्यवाही पर रोक लगा दी जाती है, तो निचली अदालत फंक्टस ऑफिशियो हो जाती है। ऐसी स्थिति में ट्रायल कोर्ट को आगे की कार्यवाही करने का अधिकार नहीं रहता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 10 मार्च और 12 मार्च 2026 के सभी आदेशों को अवैध मानते हुए निरस्त (सेट असाइड) कर दिया और निर्देश दिया कि संबंधित आवेदन पर दोबारा कानून के अनुसार सुनवाई की जाए।

ट्रांसफर याचिका हुई निरर्थक-

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया कि संबंधित प्रेसीडिंग ऑफिसर का तबादला हो चुका है और नए अधिकारी ने पदभार ग्रहण कर लिया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अब ट्रांसफर याचिका का कोई औचित्य नहीं बचता, इसलिए इसे निराकृत किया जाता है।

प्रेसीडिंग ऑफिसर से मांगा स्पष्टीकरण-

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि संबंधित प्रेसीडिंग ऑफिसर से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण लिया जाए कि स्टे आदेश के बावजूद उन्होंने सुनवाई क्यों जारी रखी। यह रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रशासनिक पक्ष में प्रस्तुत की जाएगी।

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