वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर केवल कृतज्ञता ज्ञापित करना पर्याप्त नहीं – ललित

बिलासपुर। युगाब्द 5128 पुरुषोत्तम मास अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा धर्मात्मा अहिल्याबाई होल्कर जयंती के पावन अवसर पर आज प्रातः 6 बजे से 7.30 बजे तक 36 मॉल के समीप उत्सव वाटिका में नए दृष्टिकोण वाले शिविर के एक दिवसीय शिविर का विशेष सत्र आयोजित किया गया। सर्वप्रथम पूरे श्रद्धाभाव के साथ जगत पिता सूर्यदेव के अंश के रूप में ज्योति जी को आमंत्रित कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया। सभी ने पूर्ण भाव के साथ विविध प्रयोग किये। शरीर, मन और चेतना की यात्रा में अग्रसर ललित अग्रवाल ने काल गणना पर चर्चा करते हुए तीन वर्ष बाद पुरुषोत्तम मास आने के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करते हुये वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर को याद करते हुये उनके तत्कालीन कार्यों की सराहना की गई।

उस दौर में जब आक्रांताओ द्वारा काशी, सोमनाथ जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थान विध्वंस किए जा रहे थे। तब भारतीय धर्मनिष्ठ वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर ने तन मन धन सर्वस्व अर्पण कर इन तीर्थ स्थलों की पुनर्स्थापना की थी। यदि वे कदम आगे नहीं बढ़ाती तो इतिहास कुछ और ही होता। अत: आज उनकी जयंती पर केवल उन्हें याद करना ही पर्याप्त नहीं, अपितु उन कारणों का निवारण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बिलासपुर के सभी साधकों द्वारा एकसाथ कर अदृश्य नाश्ते का सेवन किया गया। आज के आयोजन को सफल बनाने में ललित अग्रवाल, उत्सव वाटिका से उमाशंकर साहू, पी आर साहू, पी आर यादव, गोकुल यादव, सुरेश अग्रवाल, आर एस अवस्थी, श्रीमती आशालता दुबे, मुकेश चौबे, रामगोपाल साहू, डी पी सक्सेना, आर आर सर्वे, ए के दीक्षित, संतोष मिश्रा, श्रीमती ममता मिश्रा, श्रीमती शकुंतला यादव आर एस अवस्थी, रामगोपाल साहू, के पी साहू, श्रीमती अंजू साहू, दीपचंद कश्यप, बी आर यादव गार्डन साधना केंद्र से पूर्णिमा पिल्ले, संतोष वर्मा, सरोजनी वर्मा, किरण श्रीवास्तव, प्रगति दुबे, गोपाल अग्रवाल, संगीता केशरवानी, अनिल केशरवानी, गणेश सोनवानी, आर तावड़कर, पूर्णिमा साहू नेचर सिटी सकरी से आर एस विंध्यराज, प्रेमलता विंध्यराज, नरेन्द्र यादव, रामचंद्र दुबे, ब्रिजेन्द्र पाण्डेय, देबब्रत कर, ममता कर, मधु शर्मा, शांति वस्त्रकार, रूबी सिन्हा, गौरीशंकर कोरी, अवतार सिंह , राजकुमार पांडेय सहित अनेकों साधकों का योगदान रहा।