बजौरा (कुल्लू) में शीतोष्ण फल फसलों की खेती एवं अनुसंधान से रूबरू हुए बीटीसी कृषि महाविद्यालय बिलासपुर के विद्यार्थी

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत 30 मई 2026 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले स्थित बजौरा में विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी अनुसंधान संस्थानों का भ्रमण कर शीतोष्ण फल फसलों की उन्नत खेती एवं अनुसंधान गतिविधियों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

इस दौरान विद्यार्थियों ने हिल एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एक्सटेंशन सेंटर, बजौरा, रीजनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड ट्रेनिंग स्टेशन, बजौरा तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा का भ्रमण किया। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्वतीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली शीतोष्ण फल फसलों की वैज्ञानिक खेती, नवीन तकनीकों एवं अनुसंधान कार्यों से अवगत कराना था।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कीवी, सेब, आड़ू (पीच) एवं प्लम जैसी महत्वपूर्ण शीतोष्ण फल फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, उच्च उत्पादक किस्मों तथा बागवानी प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया। संस्थान के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इन फसलों की जलवायु आवश्यकताओं, पौधरोपण पद्धतियों, पोषण प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं छंटाई तकनीकों तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक विधियों की जानकारी प्रदान की।
विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र पाल तथा डॉ. देवलश सहित अन्य अधिकारियों ने विद्यार्थियों को अनुसंधान केंद्रों में संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं एवं फलोत्पादन से संबंधित नवीनतम तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। विद्यार्थियों ने अनुसंधान प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षण इकाइयों, नर्सरी प्रबंधन प्रणालियों तथा प्रयोगात्मक बागानों का निरीक्षण कर व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा (कुल्लू) का भ्रमण किया, जो चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यहां वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र ठाकुर ने विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों, किसानों के लिए संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा कृषि विस्तार सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने नई कृषि तकनीकों, जैविक खेती, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन, ऑन-फार्म टेस्टिंग तथा स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि कृषि विज्ञान केंद्र किस प्रकार अनुसंधान एवं किसानों के बीच तकनीकी सेतु का कार्य करता है।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में अपनाई जा रही उन्नत कृषि एवं उद्यानिकी तकनीकों को समझने में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
यह शैक्षणिक भ्रमण डॉ. पुष्पलता तिर्की, वैज्ञानिक (सब्जी विज्ञान) एवं डॉ. यशपाल सिंह निराला, सहायक प्राध्यापक (कीटविज्ञान) के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। छात्र दल का प्रतिनिधित्व मोक्ष चंद्राकर एवं चारु पटेल ने किया। सम्पूर्ण भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ.एन.के. चौरे के मार्गदर्शन में किया गया।
महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने इस भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें शीतोष्ण फल उत्पादन, अनुसंधान पद्धतियों तथा कृषि विस्तार गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित करने का अवसर मिला, जो भविष्य में उनके कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में पेशेवर विकास के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।