करोड़ों की सड़क परियोजना में लापरवाही उजागर, गुणवत्ताहीन निर्माण तोड़ने से खुली पोल

बिना सूचना पटल और स्थानीय निगरानी के चल रहा करोड़ों का निर्माण कार्य
तखतपुर : जनता को बेहतर सड़क, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और आधुनिक यातायात सुविधा देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-130ए) सड़क परियोजना अब निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। मोढ़े मार्ग से बरेला मनियारी पुल तक चल रहे चौड़ीकरण एवं पुनर्निर्माण कार्य में स्थानीय स्तर पर प्रभावी निरीक्षण का अभाव, निर्माण एजेंसी का स्थायी कार्यालय नहीं होना तथा निर्माण कार्य से संबंधित सूचना पटल (डिस्प्ले बोर्ड) कहीं भी नहीं लगाए जाने से पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

परियोजना के तहत मोढ़े मार्ग से वेलकम गेट तक 80 फीट तथा वेलकम गेट से मनियारी पुल तक 74 फीट चौड़ी सड़क के साथ दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की इस परियोजना को क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया था, लेकिन निर्माण स्थल पर निगरानी व्यवस्था कमजोर दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी का क्षेत्र में कोई कार्यालय नहीं होने से ठेकेदार पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आता। नियमित तकनीकी निरीक्षण के अभाव में निर्माण कार्य मनमाने तरीके से किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि परियोजना से संबंधित आवश्यक जानकारी, जैसे कार्य की लागत, निर्माण अवधि, एजेंसी का नाम, तकनीकी अधिकारियों के नाम और शिकायत के लिए संपर्क विवरण दर्शाने वाला सूचना पटल (प्रोजेक्ट बोर्ड) कहीं भी नहीं लगाया गया है। इससे आम नागरिकों को यह तक जानकारी नहीं है कि कार्य किस एजेंसी द्वारा, कितनी लागत से और किस समय सीमा में किया जा रहा है।


क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पारदर्शिता के अभाव का लाभ उठाकर ठेकेदार अपनी सुविधा के अनुसार निर्माण कार्य कर रहा है। इतना ही नहीं, निर्माण में हुई गुणवत्ता संबंधी खामियों को छिपाने के लिए कई स्थानों पर ठेकेदार द्वारा पहले से किए गए गुणवत्ताहीन निर्माण को स्वयं ही तोड़ दिया गया, जिससे निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता उजागर हो गई। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण पूरी तरह मानकों के अनुरूप होता तो उसे दोबारा तोड़ने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
इस स्थिति ने संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि से संचालित परियोजना में यदि स्थानीय स्तर पर नियमित निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जा रही है, तो निर्माण की गुणवत्ता पर स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होना लाजिमी है।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि परियोजना की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री और गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए, निर्माण स्थल पर तत्काल सूचना पटल लगाया जाए तथा निर्माण एजेंसी का स्थानीय कार्यालय स्थापित कर नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।

यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, गुणवत्ता से समझौता या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो और लोगों को गुणवत्तापूर्ण निर्माण का लाभ मिल सके।
