नाला पाटने से खेत डूबे,किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद,बिलासपुर में फूटा गुस्सा,कॉलोनाइजर पर कार्रवाई की मांग

किसानों का आरोप- कॉलोनाइजर की मनमानी ने डुबो दी धान की फसल, कलेक्टर से लगाई गुहार
बिलासपुर। अतिवृष्टि के बाद अब किसानों का गुस्सा भी उफान पर है। जिले के ग्राम सेंदरी के किसानों ने कलेक्टर जनदर्शन पहुंचकर आरोप लगाया कि एक कॉलोनाइजर द्वारा प्राकृतिक नाले पर कब्जा कर उसे पाट देने के कारण हजारों एकड़ नहीं तो बड़े क्षेत्र की कृषि भूमि जलमग्न हो गई और धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पानी की निकासी रोकने से पैदा हुई स्थिति है, जिसने उनकी सालभर की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया।
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में ग्राम सेंदरी के ग्रामीणों ने बताया कि उनकी खेती तालानार खार क्षेत्र में स्थित है। सेंदरी से लगे बरपाली, रमतला, मोपका बाईपास, मालाबंद सहित आसपास के चार से पांच गांवों का बरसाती पानी वर्षों से सड़क किनारे बने प्राकृतिक नाले से होकर करूवा बाबा मंदिर के पास स्थित पुल के रास्ते अरपा नदी में मिलता रहा है।
किसानों का आरोप है कि इसी प्राकृतिक नाले पर एक कॉलोनाइजर ने कब्जा कर लिया। आवेदन के मुताबिक पहले जहां नाले की चौड़ाई लगभग 20 से 25 फीट थी, उसे पाटकर केवल 3 से 4 फीट की अंडरग्राउंड पाइप डाल दी गई। किसानों का कहना है कि इतनी संकरी पाइप से भारी बारिश का पानी नहीं निकल पाया, जिससे पानी खेतों में भर गया और धान की पूरी फसल डूबकर नष्ट हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहने से फसल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिन खेतों में अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, वहां अब केवल पानी और बर्बादी दिखाई दे रही है। किसानों ने आरोप लगाया कि यदि प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को नहीं रोका जाता तो खेतों में इतना जलभराव नहीं होता। उनका कहना है कि कॉलोनाइजर की ओर से की गई छेड़छाड़ का खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
आवेदन में किसानों ने मांग की है कि कब्जा किए गए नाले को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया जाए, पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो भविष्य में जान-माल का नुकसान भी हो सकता है।
इस आवेदन पर ग्राम सेंदरी के राजेंद्र साय, अजय पटेल व्यारा, ग्राम सेंदरी,मशन पटेल, नरबदा प्रसाद देवांगन, लवकरी साय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसानों के हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने प्रशासन के सामने अपनी आर्थिक तबाही और जलभराव की समस्या को प्रमुखता से उठाया।