Blog

बाढ़ में बह गई जिंदगी की रफ्तार,दिव्यांग की मोटराइज्ड साइकिल भी हुई खराब,मदद के लिए कलेक्टर दफ्तर के चक्कर काटती रही महिला

मकान ढहा, सामान बहा, किराए के घर में शरण…

समाज कल्याण विभाग से लौटा दी गई दिव्यांग, फिर कलेक्टर के सामने फूटा दर्द

बिलासपुर। बाढ़ की तबाही के बीच एक दिव्यांग महिला की दर्दभरी कहानी सामने आई है। सिर से छत छिन गई, घर का सामान पानी में बह गया, और अब जीवन की सबसे बड़ी सहारा बनी मोटराइज्ड साइकिल भी खराब हो गई। मदद की आस लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची महिला को पहले समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी। आखिरकार दोबारा कलेक्टर के सामने पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाने के बाद उसे साइकिल बनवाने का आश्वासन मिला।

दरअसल सरकंडा क्षेत्र के खमतराई में रहने वाली दिव्यांग महिला और उसके पति ने अपनी आपबीती सुनाई। महिला ने बताया कि चार दिन पहले आई बाढ़ में उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया। घर में रखा खाने-पीने का सामान और जरूरी घरेलू सामग्री पानी में बह गई। बाढ़ के बाद परिवार को अपना घर छोड़कर किराए के मकान में शरण लेनी पड़ी है।
महिला ने बताया कि वह दिव्यांग है और करीब तीन साल पहले समाज कल्याण विभाग की ओर से उसे मोटराइज्ड साइकिल प्रदान की गई थी। यही साइकिल उसकी आवाजाही का मुख्य साधन थी, लेकिन बाढ़ के दौरान वह भी खराब हो गई। साइकिल खराब होने से उसकी परेशानी कई गुना बढ़ गई है।

बॉक्स
कलेक्टर ने भेजा, विभाग ने लौटाया

पीड़ित दंपती के अनुसार, मदद की उम्मीद लेकर वे कलेक्टर के पास पहुंचे थे। उनकी समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने उन्हें समाज कल्याण विभाग भेजा। मंगलवार को दोनों विभाग पहुंचे, लेकिन वहां अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं की और उन्हें वापस लौटा दिया।
विभाग से निराश होकर लौटे दंपती ने फिर कलेक्टर कार्यालय का रुख किया। दिव्यांग महिला ने अपने पति के साथ दोबारा कलेक्टर के सामने पूरी स्थिति रखी। उसने बताया कि बाढ़ में मकान रहने लायक नहीं बचा, सामान बह गया, किराए के घर में रहना पड़ रहा है और उसकी मोटराइज्ड साइकिल भी खराब हो चुकी है।

बॉक्स
कलेक्टर के सामने छलका दर्द

कलेक्टर कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाते हुए महिला भावुक हो गई। उसने बताया कि दिव्यांग होने के कारण रोजमर्रा के कामों और आवागमन के लिए वह पूरी तरह मोटराइज्ड साइकिल पर निर्भर है। साइकिल खराब होने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
दंपती की बात सुनने के बाद कलेक्टर ने मोटराइज्ड साइकिल को बनवाने का आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने केवो बाद दोनों के चेहरे पर कुछ राहत दिखाई दी।

बॉक्स
बाढ़ के बाद संघर्ष की तस्वीर

एक तरफ बाढ़ में उजड़ा आशियाना, दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष, ऊपर से दिव्यांगता की चुनौती। खमतराई की यह महिला इन दिनों इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रही है। किराए के मकान में किसी तरह दिन गुजर रहे हैं, जबकि पति मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाने की कोशिश कर रहा है। बाढ़ के बाद राहत और सहायता की उम्मीद में दंपती लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *