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शासकीय महाविद्यालयों के अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर किया एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन

रायपुर, 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता पीएचडी, नेट, सेट एवं एम.फिल. कल्याण संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया।

धरना-प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में अतिथि व्याख्याता, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी छह प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाया और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने हाथों में बैनर, पोस्टर और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर अपनी आवाज बुलंद की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर रैली निकाली। पुलिस प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग कर रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इसके विरोध में प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

संघ ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में हो रही देरी चिंता का विषय है। 17 जुलाई 2026 को नई नीति जारी होने के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

संघ ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी छह प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें 11 माह की पूर्णकालिक अवधि तक तत्काल नियुक्ति, 50 हजार रुपये प्रतिमाह एकमुश्त वेतन, महिला अतिथि व्याख्याताओं के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश, 65 वर्ष की आयु तक सेवा-सुरक्षा, पीएससी सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में 15 से 20 बोनस अंक तथा आयु-सीमा में विशेष छूट शामिल हैं।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के अनेक अतिथि व्याख्याता पिछले कई वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा-सुरक्षा एवं नियुक्ति से संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने शासन से मांग की कि प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों में एक समान तिथि से नियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और न्याय पालिका का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे ।

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