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बिलासपुर के श्री पीतांबरा पीठ में सावन महोत्सव व महारुद्राभिषेक महायज्ञ जारी,नाग पंचमी का महात्म्य, पूजन विधि एवं आध्यात्मिक संदेश

बिलासपुर । सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में परमपूज्य गुरुदेव भगवान के पावन आशीर्वाद एवं पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सान्निध्य में सावन महोत्सव (चतुर्थ वर्ष) एवं श्री महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप भव्य रूप से जारी है। 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का महारुद्राभिषेक एवं आराधना कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में प्रतिदिन प्रातः 9: बजे से दोपहर 1:30 बजे तक श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का नमक-चमक वैदिक मंत्रों के साथ महारुद्राभिषेक किया जाता है, जिसके उपरांत दोपहर 1:30 बजे महाआरती संपन्न होती है।

महोत्सव के दौरान नाग पंचमी के पावन अवसर पर पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय वासुकि नाग की जलन को शांत करने के लिए भगवान शिव ने सावन की पंचमी तिथि को उनका जलाभिषेक किया था। इसके अलावा महाभारत काल में आस्तिक मुनि ने इसी तिथि पर जनमेजय के नागदाह यज्ञ को शांत करवाकर नागवंश की रक्षा की थी। सनातन संस्कृति में नाग देव को भगवान शिव का आभूषण और श्री हरि विष्णु की शैया माना गया है।
नाग पंचमी के महत्व और लाभ पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की आराधना से कुंडली के कालसर्प दोष, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव तथा सर्प भय से मुक्ति मिलती है। नाग देव को पाताल लोक का स्वामी व गुप्त धन का संरक्षक माना जाता है, अतः इनकी कृपा से घर में धन-धान्य और वंश की वृद्धि होती है। मंदिर या घर में दीवार पर हल्दी, गेरू या गोबर से नाग-नागिन का प्रतीकात्मक जोड़ा बनाएं अथवा धातु की प्रतिमा स्थापित करें। नाग देवता को रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूर्वा, मदार और पुष्प अर्पित कर कच्चा दूध व गंगाजल चढ़ाएं। तदुपरांत दूध, धान का लावा खीले का भोग लगाकर “ओम नवकुलनागाय विद्महे विषदन्ताय धीप्रेस विज्ञप्तिमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्” अथवा “ओम नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। आचार्य ने विशेष संदेश दिया कि जीवित नाग को दूध पिलाने के बजाय प्रतिमा या चित्र पर ही प्रतीक रूप से दूध अर्पण करें।
आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने अंत में कहा कि श्रद्धा, भक्ति एवं निष्काम भाव से किया गया शिवाभिषेक साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। सावन और नाग पंचमी जैसे पर्व हमारी आध्यात्मिक आस्था को जीव-संरक्षण और सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।

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