बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर का रजत जयंती समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से ‘A’ श्रेणी की उपलब्धि पर कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दी बधाई; कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर दिया जोर
वार्षिक पत्रिका ‘संचयन 2026’, रजत जयंती स्मारिका एवं बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के जीवन-वृत्त पर आधारित फोल्डर का हुआ विमोचन; मेधावी विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों का सम्मान
बिलासपुर, । बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 15 अक्टूबर 2026 को महाविद्यालय परिसर में रजत जयंती समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया। यह अवसर संस्थान की 25 वर्षों की गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों, अनुसंधानपरक गतिविधियों, नवाचारों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण के प्रति समर्पित योगदान का उत्सव बना। समारोह में कृषि शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की शैक्षणिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक अनुसंधान, कौशल विकास, उद्यमिता तथा कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विशेष बल दिया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा महाविद्यालय को ‘A’ श्रेणी प्रदान किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाविद्यालय के प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान को प्राप्त ऐसी उपलब्धि उसके शैक्षणिक वातावरण, कार्यसंस्कृति, गुणवत्ता, अनुशासन तथा सामूहिक प्रयासों का प्रतिबिंब होती है। यह उपलब्धि महाविद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा भी है।
डॉ. चंदेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों की भूमिका विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, उत्पादन लागत में वृद्धि, बाजार की अनिश्चितताओं तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को परंपरागत ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कृषि को केवल पारंपरिक आजीविका के रूप में न देखकर इसे नवाचार, उद्यमिता, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता के व्यापक अवसरों वाले क्षेत्र के रूप में अपनाएं।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को कृषि आधारित स्टार्टअप, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक एवं प्राकृतिक संसाधन आधारित उत्पादों, आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातकों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान एवं कौशल के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि महाविद्यालय भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, उपयोगी अनुसंधान और कृषक हितैषी तकनीकों के प्रसार के माध्यम से प्रदेश की कृषि प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।
सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुआ समारोह का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा तथा बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर ज्ञान, विवेक, सेवा और राष्ट्र निर्माण के आदर्शों का स्मरण किया गया। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन करते हुए कृषि शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उनके नाम से स्थापित संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया गया।
रजत जयंती का यह आयोजन केवल स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव नहीं, बल्कि संस्थान की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने, पूर्व उपलब्धियों से प्रेरणा लेने तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए नई ऊर्जा और संकल्प अर्जित करने का अवसर भी बना।
25 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण
स्वागत उद्बोधन में डॉ. एन. के. चौरे ने महाविद्यालय की 25 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की प्रगति, शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों तथा कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसके विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, अनुसंधान की गुणवत्ता तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व से निर्मित होती है। इस दृष्टि से महाविद्यालय की रजत जयंती उन सभी व्यक्तियों के योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने संस्थान की स्थापना, विकास और प्रतिष्ठा में अपनी भूमिका निभाई है।
उन्होंने महाविद्यालय के वर्तमान एवं पूर्व प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा पूर्व विद्यार्थियों के सामूहिक योगदान को संस्थान की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार के माध्यम से महाविद्यालय भविष्य में भी नई उपलब्धियां अर्जित करेगा।
विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. कपिल देव दीपक, कुलसचिव, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में अनुशासन, परिश्रम, समय प्रबंधन, निरंतर अध्ययन तथा सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल उपाधि प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना है।
उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों का अधिकतम उपयोग करने, शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपने ज्ञान एवं व्यावहारिक दक्षताओं को विकसित करने तथा कृषि क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृषि स्नातकों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान का उपयोग किसानों की समस्याओं के समाधान, ग्रामीण विकास तथा कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में करें।
समारोह की विशिष्ट अतिथि एवं बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल की सुपुत्री श्रीमती रत्नावली सिंह की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम को पारिवारिक आत्मीयता, ऐतिहासिक गौरव और प्रेरणादायी स्मृतियों से जोड़ दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के जीवन, विचारों एवं आदर्शों का उल्लेख करते हुए उनके नाम से संचालित संस्थान की प्रगति और प्रतिष्ठा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा, परिश्रम, चरित्र निर्माण तथा समाज के प्रति कर्तव्यबोध को जीवन में सर्वोच्च महत्व देने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय शर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, राष्ट्रीय सेवा योजना तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता और सेवा का भाव भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को समृद्ध बनाते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा महाविद्यालय और विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
वार्षिक पत्रिका ‘संचयन 2026’ एवं रजत जयंती स्मारिका का विमोचन
रजत जयंती समारोह का एक प्रमुख आकर्षण महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘संचयन 2026’, रजत जयंती स्मारिका तथा बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के जीवन-वृत्त पर आधारित फोल्डर का विमोचन रहा। मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश चंदेल एवं अन्य अतिथियों ने इन प्रकाशनों का विमोचन किया।
‘संचयन 2026’ महाविद्यालय की शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को अभिव्यक्ति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। यह विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा, विचारों, अनुभवों और उपलब्धियों को सामने लाने के साथ-साथ संस्थान की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण भी करता है।
रजत जयंती स्मारिका ने महाविद्यालय की 25 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और संस्थान से जुड़े व्यक्तियों के योगदान को संजोने का अवसर प्रदान किया। वहीं, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल के जीवन-वृत्त पर आधारित फोल्डर उनके व्यक्तित्व, विचारों और सामाजिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन प्रकाशनों के माध्यम से संस्थान ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने तथा भावी पीढ़ियों को उससे परिचित कराने का सार्थक प्रयास किया।
मेधावी विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों का सम्मान
समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बीएससी कृषि के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में महाविद्यालय स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी मेहनत, लगन, अनुशासन और शैक्षणिक प्रतिबद्धता की सराहना की गई।
विश्वविद्यालय स्तर पर स्नातक पाठ्यक्रम में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली अमृता मंडल तथा कांस्य पदक प्राप्त करने वाली मानसी चंद्राकर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियों को महाविद्यालय परिवार के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए अन्य विद्यार्थियों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया गया।
मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इससे यह संदेश दिया गया कि निरंतर परिश्रम, समर्पण और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से उत्कृष्ट उपलब्धियां अर्जित की जा सकती हैं। विद्यार्थियों की सफलताओं में शिक्षकों के मार्गदर्शन, संस्थान के शैक्षणिक वातावरण तथा परिवार के सहयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
खेलकूद, एनसीसी एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रतिभागियों का सम्मान
महाविद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, सामाजिक सेवा, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित गतिविधियों में उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
खेलकूद प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को उनके उत्साह, खेल भावना और प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। खेलकूद विद्यार्थियों में अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास, सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।
एनसीसी कैडेट्स को भी उनके अनुशासन, समर्पण और गतिविधियों में सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। एनसीसी विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा तथा सेवा भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत विश्वविद्यालय स्तर पर ‘विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग’ तथा ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ में महाविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवक देवराज एवं मानसी चंद्राकर को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इन गतिविधियों में सहभागिता विद्यार्थियों की सामाजिक जागरूकता, नेतृत्व क्षमता तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।
इन सम्मानों के माध्यम से महाविद्यालय ने यह रेखांकित किया कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, सामाजिक सहभागिता, नेतृत्व, खेल भावना और रचनात्मक योगदान से भी किया जाना चाहिए।
रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह के दौरान छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को उल्लासपूर्ण और जीवंत बना दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता, कलात्मक अभिव्यक्ति तथा सामूहिक सहभागिता की झलक देखने को मिली।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह की गरिमा में चार चांद लगाए और उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा पूर्व विद्यार्थियों को उत्सव के इस विशेष अवसर से भावनात्मक रूप से जोड़ा। इस आयोजन ने यह भी प्रदर्शित किया कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक अभिरुचियों और बहुआयामी प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की 25 वर्षों की यात्रा कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ग्रामीण विकास के व्यापक उद्देश्यों से जुड़ी रही है। कृषि महाविद्यालय के साथ क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर की गतिविधियां भी कृषि ज्ञान के विकास, वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
आज कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करना, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण, जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना तथा कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना समय की प्रमुख आवश्यकताएं हैं। ऐसे परिदृश्य में कृषि शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
कृषि वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित कर अनुसंधान के निष्कर्षों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना, स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकों को प्रोत्साहित करना तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना संस्थान के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा हो सकती है। रजत जयंती समारोह ने इन उद्देश्यों के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।
पूर्व अधिष्ठाताओं, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं पूर्व विद्यार्थियों की सहभागिता
समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. एस. एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी; डॉ. एस. के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर; डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाताओं, पूर्व प्राध्यापकों, पूर्व कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों एवं एलुमनाई सदस्यों की सहभागिता ने समारोह को विशेष महत्व प्रदान किया। पूर्व विद्यार्थियों और संस्थान से जुड़े पूर्व शिक्षकों की उपस्थिति ने अतीत और वर्तमान के बीच एक आत्मीय सेतु स्थापित किया। यह अवसर उन सभी व्यक्तियों के योगदान को स्मरण करने का भी बना, जिन्होंने विभिन्न चरणों में महाविद्यालय की प्रगति और प्रतिष्ठा में अपना योगदान दिया।
समारोह में महाविद्यालय, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए। सभी की सहभागिता ने इस आयोजन को सामूहिक उपलब्धि और संस्थागत गौरव के उत्सव में परिवर्तित कर दिया।
सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने किया। उन्होंने समारोह की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की गरिमा और प्रवाह बनाए रखा। अंत में डॉ. अजय टेगर ने आभार प्रदर्शन करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, पूर्व अधिष्ठाताओं, पूर्व प्राध्यापकों, पूर्व कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों, एलुमनाई सदस्यों तथा समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर उज्ज्वल भविष्य की ओर
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर का रजत जयंती समारोह केवल 25 वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं और संकल्पों का भी प्रतीक बना। समारोह ने संस्थान की शैक्षणिक विरासत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, विद्यार्थियों की प्रतिभा और सामूहिक प्रयासों की शक्ति को सामने रखा।
रजत जयंती के इस अवसर ने यह विश्वास और दृढ़ किया कि गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, उपयोगी अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, उद्यमिता और कृषक कल्याण के समन्वित प्रयासों से कृषि क्षेत्र को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और रोजगारोन्मुख बनाया जा सकता है।
महाविद्यालय की 25 वर्षों की यात्रा भविष्य के लिए नई ऊर्जा, नए लक्ष्य और नई संभावनाओं का आधार है। संस्थान से जुड़े सभी लोगों की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ यह उम्मीद की जा सकती है कि महाविद्यालय आने वाले वर्षों में भी कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के नए प्रतिमान स्थापित करेगा तथा छत्तीसगढ़ की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषक समुदाय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।