कारगिल विजय दिवस: भारत के इतिहास की गौरवशाली गाथा, वीरों का बलिदान सदैव रहेगा प्रेरणास्रोत — हॉनरेरी कैप्टन रविंद्रनाथ गोपाल

राष्ट्रीय सेवा योजना एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर इकाई की संयुक्त पहल पर आयोजित हुआ प्रेरक कार्यक्रम
बिलासपुर, । कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में एक गरिमामय श्रद्धांजलि एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अद्वितीय साहस, शौर्य, बलिदान एवं राष्ट्रभक्ति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हॉनरेरी कैप्टन रविंद्रनाथ गोपाल ने कारगिल विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि 26 जुलाई भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है, जब भारतीय सेना ने कठिनतम परिस्थितियों में अद्वितीय पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए कारगिल की दुर्गम पर्वत चोटियों से घुसपैठियों को खदेड़कर ‘ऑपरेशन विजय’ को सफल बनाया। यह विजय केवल एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता और सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारतीय सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। शून्य से भी नीचे तापमान, दुर्गम पहाड़ियां, दुश्मन की ऊंची चौकियां और लगातार गोलाबारी जैसी विषम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जवानों ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया और अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र का मस्तक गौरवान्वित किया।
अपने अनुभव साझा करते हुए हॉनरेरी कैप्टन गोपाल ने छात्र-छात्राओं को बताया कि युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि मनोबल, अनुशासन, धैर्य और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का भी होता है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक अपने परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सैनिकों के त्याग और बलिदान का सम्मान करे तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि देश का युवा जागरूक, जिम्मेदार और चरित्रवान होगा तो भारत निश्चित रूप से विश्व में और अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
स्वागत उद्बोधन देते हुए वैज्ञानिक एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर ने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमें राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों के अद्वितीय साहस और बलिदान का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि यह दिवस युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा राष्ट्रीय कर्तव्यबोध विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।
इसके पश्चात उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने कारगिल युद्ध में शहीद हुए अमर वीर सपूतों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति और कृतज्ञता की भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे ने अपने उद्बोधन में कहा कि कारगिल युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता, आत्मविश्वास और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक मजबूत किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को कारगिल के वीरों के संघर्ष, साहस और त्याग से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे ने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा के लिए असंख्य सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर डॉ. चौरे ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को ‘पंच प्रण’ की शपथ दिलाई, जिसमें राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक समरसता को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक इन मूल्यों को व्यवहार में उतारे, तो भारत एक विकसित, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय एवं क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के समस्त प्राध्यापक, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी अजीत विलियम्स ने किया, अंत में एनसीसी प्रभारी डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।