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खैर लकड़ी तस्करी संगठित गिरोह पर और कसा शिकंजा, पुलिस की तकनीकी विवेचना से बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा…. मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल को फेक इनवॉयस प्रदान करने वाले दो आरोपी फर्म संचालक गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस को सरगना मनीष अग्रवाल के सिंडीकेट द्वारा पिछले दो साल के भीतर उड़ीसा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की तस्करी के प्रमाण मिले।

गैरकानूनी कारोबार को कागजों में वैध दिखाने के शातिर उद्देश्य से कुल 8 शेल कंपनियों का उपयोग कर फर्जी इनवॉयसिंग तैयार की जाती थी।

अवैध कारोबार से मिलने वाली भारी-भरकम रकम के लेनदेन, भुगतान और लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया जा रहा था।

महासमुंद पुलिस ने विगत 7 सितंबर को सरगना मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी पर 81 लाख रुपया जप्त किया था।

महासमुंद पुलिस,वन विभाग,और वित्त एजेंसियों के समन्वय से इस संगठित गिरोह द्वारा अर्जित की गई अवैध संपत्तियों कुर्की/ राजसात की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

महासमुन्द । अवैध गतिविधियों, वनोपज के अवैध परिवहन, और धोखाधड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों के विरूद्ध लगातार सख्त कार्यवाहियां की जा रहीं हैं। इसी क्रम में, वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन पर खैर लकड़ी (कुल 23,350 किलोग्राम) के अवैध परिवहन हेतु प्रयुक्त एनटीपीएस (NTPS) एनओसी (NOC) में शातिर तरीके से कूटरचना कर उसका असल रूप में उपयोग करने और शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुँचाने के मामले में थाना पिथौरा में अपराध क्रमांक 172/2026 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5), 111 एवं आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42(1) सहपठित धारा 41(2) (ख) (घ) एवं धारा 52(1) के अंतर्गत दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
इसी तारतम्य में विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों के आधार पर संलिप्त आरोपीगणों के विरुद्ध लगातार वैधानिक कार्यवाही जारी है। प्रकरण की विवेचना के दौरान, महासमुंद पुलिस ने विगत 7 सितंबर को सरगना मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी पर 81 लाख रुपया जप्त किया था। इसी दौरान कड़ियों को आपस में जोड़ते हुए महासमुंद पुलिस की तकनीकी विवेचना में यह मामला एक विशाल अंतरराज्यीय व संगठित गिरोह के रूप में सामने आया है। इससे यह तथ्य उजागर हुआ कि आरोपी मनीष अग्रवाल और उसके संगठित गिरोह द्वारा पिछले दो साल के भीतर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उड़ीसा से लेकर हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की अवैध तस्करी की गई है।इस अवैध कारोबार को कागजों में वैध रूप देने के लिए फेक इनवॉयसिंग हेतु 8 शेल कंपनियां बनाई गई थीं, तथा अवैध टर्नओवर की भारी-भरकम रकम के लेनदेन, भुगतान और उसकी लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा था। पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर, महासमुंद पुलिस ने उड़ीसा से इन फर्जी कंपनियों का संचालन करने वाले और इस नेटवर्क को फेक इनवाइस उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को दिनांक 14.09.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया है। प्रकरण में संलिप्त अन्य सह-आरोपियों की धरपकड़, वित्तीय ट्रेल की गहन जाँच और साक्ष्य संकलन हेतु पुलिस पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रही है।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण:

01- पारितोष मिश्रा, पिता श्री सुरेंद्र मिश्रा, उम्र 47 वर्ष (संचालक पीयूष इंटरप्राइजेज), वर्तमान क्र. 4, प्लाट नंबर 373, रफाजाल, सालेभाटा, बोलांगीर, जिला बोलांगीर (उड़ीसा)।
02- अखिलेश सिंघल, पिता स्व. चंद्रप्रकाश सिंघल, उम्र 52 वर्ष (संचालक सिंघल इंटरप्राइजेज संबलपुर), निवासी फार्म रोड, दिल्ली शॉ मिल के पास, बडाबाजार दुर्गा मंदिर के पास संबलपुर, थाना संबलपुर, जिला संबलपुर (उड़ीसा)।

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