गोबर्धन योजना से गौशालाओं और किसानों को मिलेगा नया अवसर : धीरेन्द्र दुबे

₹23,731 करोड़ की योजना को मंजूरी
गोबर से ऊर्जा और जैविक खाद उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
बिलासपुर।केंद्रीय मंत्रिमंडल में 6 अगस्त को गोबर्धन
योजना को वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू करने के लिए ₹23,731 करोड़ के कुल परिव्यय को मंजूरी दिए जाने का गौसेवा आयोग जिला बिलासपुर के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने स्वागत किया है।धीरेन्द्र दुबे ने कहा कि यह निर्णय गौशालाओं, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है।
गोबर्धन योजना के माध्यम से पशु गोबर, कृषि अवशेष एवं अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर संपीडित बायोगैस और जैव ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का लक्ष्य देश में सीबीजी के घरेलू उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि गोबर अब केवल अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और ऊर्जा का महत्वपूर्ण संसाधन है। गौशालाओं में उपलब्ध गोबर का वैज्ञानिक उपयोग कर बायोगैस के साथ जैविक खाद का भी उत्पादन किया जा सकता है। इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और किसानों की अतिरिक्त आय में योगदान देने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि गैस उत्पादन के बाद प्राप्त जैविक स्लरी का उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है, जिससे किसानों को जैविक कृषि के लिए उपयोगी संसाधन उपलब्ध होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा।
धीरेन्द्र दुबे ने कहा कि “गौसेवा, किसान कल्याण और स्वच्छ ऊर्जा को एक साथ जोड़ने की दिशा में गोबर्धन योजना महत्वपूर्ण पहल है। गौमाता से मिलने वाला गोबर अब गांव की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि योजना का लाभ अधिक से अधिक गौशालाओं किसानों और ग्रामीण उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता एवं मार्गदर्शन किया जायेगा।