गौठान के लिए हर राशन कार्डधारी से मांगे 1000 रुपए,पैरा दान भी अनिवार्य करने का आरोप,काठाकोनी में ग्रामीणों का विरोध
मवेशियों को गौठान में रखने पंचायतों को अपने खर्च पर चौकीदार रखने के मौखिक निर्देश
बिलासपुर। बिलासपुर-रतनपुर मार्ग पर 4 अगस्त को हुए सड़क हादसे में नौ मवेशियों की मौत के बाद सड़कों पर घूमने वाले लावारिस मवेशियों को गौठानों में रखने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जनपद पंचायत बिल्हा के अधिकारियों ने नेशनल हाईवे से लगी ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर दो चौकीदार रखने और मवेशियों को गौठानों में रखने के मौखिक निर्देश दिए हैं। इसके बाद अब गौठानों के संचालन और रखरखाव के लिए ग्रामीणों से सहयोग राशि जुटाने का मामला सामने आया है।
दरअसल ग्राम पंचायत काठाकोनी के जूनापारा में प्रति राशन कार्ड 1000 रुपए सहयोग राशि मांगे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप में जारी संदेश में राशन कार्डधारियों से तीन दिन के भीतर 1000 रुपए जमा करने और इसके बाद राशन लेने की बात कही गई। संदेश सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और इसे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।
राशन से पहले 1000 रुपए जमा करने का संदेश
ग्रामीणों के मुताबिक, राशन दुकान संचालक की ओर से व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजकर कहा गया कि सभी राशन कार्डधारी तीन दिन के भीतर गौठान के लिए 1000 रुपए की सहयोग राशि जमा करें। इसके बाद ही राशन लेने की बात कही गई।
काठाकोनी में कुल करीब 491 राशन कार्डधारी बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए खाद्य निरीक्षक से शिकायत की है। उनका कहना है कि सड़कों पर मवेशियों की समस्या से निपटना प्रशासन और पंचायत की जिम्मेदारी है। इसके लिए गरीब राशन कार्डधारियों से राशि लेना उचित नहीं है।
सरपंच बोले- चावल रोकने का निर्णय नहीं
विवाद बढ़ने के बाद ग्राम पंचायत काठाकोनी के सरपंच प्रवीण कौशिक ने कहा कि राशन देने पर रोक लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों की बैठक में फसल को मवेशियों से बचाने और उनके प्रबंधन के लिए सहयोग राशि लेने पर चर्चा हुई थी। यह राशि अनिवार्य नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि राशन दुकान संचालक का मोबाइल हैक हो गया था, जिसके कारण विवादित संदेश प्रसारित हुआ।
पैरा दान और मवेशियों पर जुर्माने का भी निर्णय
गौठान में मवेशियों को रखने की व्यवस्था के साथ ग्रामीणों से पैरा दान करने की अपील भी की गई है। वहीं ग्राम पंचायत में बैठक के बाद 7 अगस्त से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले मवेशियों के मामले में जुर्माना तय किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पंचायत स्तर पर तर्क दिया जा रहा है कि खेतों में खुले घूमने वाले मवेशियों से फसल को नुकसान हो रहा है। ऐसे में मवेशियों को पकड़कर गौठान में रखने और उनके चारे की व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की जरूरत है।
सड़क हादसे के बाद बढ़ी चिंता
बिलासपुर-रतनपुर मार्ग पर 4 अगस्त को हुए सड़क हादसे में नौ मवेशियों की मौत के बाद प्रशासन और पंचायतों की चिंता बढ़ गई है। हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशियों के घूमने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसी के बाद नेशनल हाईवे से लगी पंचायतों को मवेशियों को गौठानों में रखने के लिए सक्रिय होने के निर्देश दिए गए हैं।
अपने खर्च पर दो चौकीदार रखने और मवेशियों को गौठानों में रखने के मौखिक निर्देश
जनपद पंचायत बिल्हा के अधिकारियों ने संबंधित ग्राम पंचायतों को अपने खर्च पर दो चौकीदार रखने और मवेशियों को गौठानों में रखने के मौखिक निर्देश दिए हैं। हालांकि, पंचायतों के सामने सबसे बड़ी समस्या गौठानों के संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने की है।
चावल रोकने या वसूली का कोई आदेश नहीं: जिला पंचायत सीईओ
जिला पंचायत बिलासपुर के सीईओ संदीप अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि पंचायतों को राशन का चावल रोकने अथवा राशन कार्डधारियों से किसी तरह की राशि वसूलने का कोई आदेश नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हर साल की तरह पंचायतों को आपसी समन्वय से मवेशियों को गौठानों में रखने के लिए कहा गया है। यदि किसी पंचायत में राशन रोकने या जबरन वसूली की शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।