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गौधाम की जमीन को कब्जे से बचा लो, ग्रामीणों की गुहार,बरसात में मवेशियों का एकमात्र सहारा भी खतरे में

बिलासपुर। मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पंचायत जैतपुर में संचालित श्रीधाम गौधाम की शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौधाम के लिए आवंटित लगभग 28 एकड़ शासकीय भूमि में से करीब 15 एकड़ जमीन पर अब तक घेराबंदी नहीं हो पाई है। इसी का फायदा उठाकर गांव के कुछ लोगों द्वारा जमीन के हिस्सों पर कब्जा किए जाने और अन्य हिस्सों पर कब्जे की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की है।

दरअसल ग्राम जैतपुर में फुलबारी शिक्षण एवं समाजसेवा समिति खमतराई द्वारा संचालित श्रीधाम गौधाम आसपास के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां गांव और आसपास के क्षेत्रों में घूमने वाले सैकड़ों मवेशियों को रखने के साथ उनके चारे और पानी की व्यवस्था की जाती है। इससे आवारा मवेशियों के कारण खेतों में खड़ी फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने में भी मदद मिलती है। गौधाम के लिए प्रशासन और पंचायत के सहयोग से लगभग 28 एकड़ शासकीय भूमि आवंटित की गई है, ताकि मवेशियों के रहने और उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सके।

28 एकड़ में से केवल 13 एकड़ में घेराबंदी

जानकारी के अनुसार, गौधाम के लिए आवंटित कुल 28 एकड़ भूमि में से अब तक लगभग 13 एकड़ जमीन पर ही घेराबंदी हो सकी है। शेष करीब 15 एकड़ भूमि खुली पड़ी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी खुली जमीन के कुछ हिस्सों पर गांव के ही कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, जबकि अन्य हिस्सों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। यदि समय रहते जमीन की सुरक्षा और घेराबंदी की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में गौधाम की उपलब्ध भूमि और कम हो सकती है।

समझाइश के बाद भी कब्जे की कोशिश का आरोप

बताया जा रहा है कि जमीन पर कब्जे की सूचना मिलने के बाद गौधाम संचालक और सरपंच पति मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने संबंधित लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा नहीं करने की समझाइश दी। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले भी इस संबंध में लगातार समझाइश दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से कब्जे की कोशिशें जारी हैं। आरोप है कि जमीन के एक हिस्से में जेसीबी मशीन से गड्ढे भी खोदे गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद गौधाम से जुड़े लोगों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन से सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि गौधाम की जमीन केवल एक संस्था की संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के मवेशियों के संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता रहा, तो गौधाम में मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। इससे पशुओं के चारे, पानी और देखभाल की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराने, आवंटित भूमि का सीमांकन करने, कथित अतिक्रमण की पहचान करने और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शासकीय जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की मांग की है। साथ ही, शेष भूमि पर जल्द घेराबंदी कराने की भी अपील की गई है।

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