छात्र प्रेरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ-2026’ के पांचवें दिन कृषि अनुसंधान, करियर एवं खेलकूद पर हुआ मार्गदर्शन

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित छात्र प्रेरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ-2026-27’ के पांचवें दिन विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा के साथ-साथ कृषि अनुसंधान, रोजगार, उद्यमिता, खेलकूद तथा रेशम पालन जैसे विविध क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस.के. वर्मा ने “कृषि अनुसंधान की भूमिका एवं महत्व” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार तथा पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कृषि के तीन प्रमुख आधारों—कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान और कृषि प्रसार—की परस्पर भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इन तीनों के समन्वय से ही कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी, टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल बनाया जा सकता है।
डॉ. वर्मा ने विद्यार्थियों को क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र में संचालित विभिन्न अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं तथा फल अनुसंधान परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि अनुसंधान का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत तकनीकों का विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि तथा बदलती जलवायु की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम कृषि प्रणालियों का विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान के प्रति जिज्ञासु बनने तथा महाविद्यालय में उपलब्ध प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और क्षेत्रीय गतिविधियों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
इसके पश्चात श्री विमल कुमार तिग्गा, उपसंचालक कृषि, बिलासपुर ने “कृषि के क्षेत्र में कैरियर मार्गदर्शन एवं संभावनाएं” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कृषि के व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज कृषि का क्षेत्र पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है। कृषि शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों के लिए कृषि विभाग, अनुसंधान, शिक्षण, कृषि व्यवसाय, बीज एवं पौध उत्पादन, उद्यानिकी, कृषि प्रसंस्करण, बैंकिंग, कृषि विपणन, कृषि उद्यमिता तथा विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों में अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
श्री तिग्गा ने विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में बदलती तकनीक एवं नवाचार के साथ कदमताल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृषि स्नातकों में वैज्ञानिक सोच, व्यावहारिक ज्ञान, नेतृत्व क्षमता और उद्यमशीलता का विकास उन्हें रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने वाला युवा भी बना सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर अध्ययन एवं कौशल विकास पर ध्यान देने का आह्वान किया।
भोजनावकाश के पश्चात द्वितीय सत्र में महाविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) एवं प्रभारी खेलकूद डॉ. दिनेश पांडे ने विद्यार्थियों को खेलकूद के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। नियमित खेल गतिविधियों से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अनुशासन, समय-प्रबंधन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को महाविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न खेलकूद सुविधाओं एवं खेल गतिविधियों की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को खेलों में सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
द्वितीय सत्र में श्री ऋषि कुमार सिंह, सहायक संचालक रेशम पालन, कोनी, बिलासपुर ने “रेशम पालन का महत्व एवं संभावनाएं” विषय पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने रेशम उत्पादन की प्रक्रिया, रेशम विभाग की गतिविधियों, शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं तथा रेशम पालन से जुड़े रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की। उन्होंने कोसा उत्पादन एवं कोसा निर्माण इकाइयों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रेशम पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
श्री सिंह ने विद्यार्थियों को रेशम पालन की संभावनाओं, विभागीय सहायता, प्रशिक्षण एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कृषि शिक्षा प्राप्त युवा यदि पारंपरिक कृषि के साथ संबद्ध एवं विविधीकृत गतिविधियों को अपनाएं तो वे अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। उन्होंने रेशम पालन को कृषि आधारित उद्यमिता के एक संभावनाशील क्षेत्र के रूप में अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।
‘दीक्षारंभ-2026’ के पांचवें दिन आयोजित इन सत्रों के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि कृषि शिक्षा केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसंधान, प्रसार, खेल, उद्यमिता, रोजगार और ग्रामीण विकास से जुड़ा एक व्यापक क्षेत्र है। विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यानों ने विद्यार्थियों में कृषि के प्रति नई समझ, उत्साह और भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के व्याख्यानों को उत्सुकता एवं रुचि के साथ सुना तथा विभिन्न विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। इस प्रकार ‘दीक्षारंभ-2026’ का पांचवां दिन ज्ञान, प्रेरणा, कौशल और संभावनाओं से परिचित कराने वाला उपयोगी एवं सार्थक दिवस रहा।