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जिस विभाग को जीवन दिया, आज वही दर- दर भटका रहा…? 14 महीने से पेंशन के लिए भटक रहा जल संसाधन का सेवानिवृत्त कर्मचारी, अब कलेक्टर से आखिरी उम्मीद

पेंशन भीख नही, मेरी खून पसीने की कमाई है- पीड़ित मुरारी लाल डिक्सेना.


कोरबा/पाली:- सरकार बुजुर्गों का सम्मान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हक की बड़ी- बड़ी बातें करती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत पाली के मुरारी लाल जैसे न जाने कितनों सिस्टम की मार झेल रहे कर्मचारियों की आंखों में दिखती है। जल संसाधन उप संभाग पाली के स्थल सहायक मुरारी लाल डिक्सेना जून 2025 में सेवानिवृत्त हुए और अगस्त 2026 आ गया। लेकिन इनके खाते में आज तक एक रुपए की पेंशन नही आई। ऐसे में जिस विभाग की नींव में उन्होंने अपनी जवानी खपा दी, आज उसी विभाग के बाबू और अफसर 14 महीने से इनकी फाइल पर कुंडली मारकर बैठे हैं।

नियम कहता है कि रिटायरमेंट के अगले महीने से पेंशन शुरू हो जानी चाहिए और रिटायरमेंट से पहले ही फाइल तैयार हो जानी चाहिए। लेकिन जल संसाधन उप संभाग पाली से जून 2025 में रिटायर हुए मुरारी लाल के साथ इसका उल्टा हुआ। पेंशन 14 महीने में शुरू नही हुआ और जीपीएफ/ डीपीएफ जमा पूंजी का भी एक पैसा नही मिला तथा वर्षों की समयमान वेतनमान एरियर का बकाया राशि भी अटकी है। सिस्टम की बेरुखी से 60 की उम्र में जिस सहारे पर घर का चूल्हा जलना था, वह सहारा नही मिलने से मुरारी लाल की आर्थिक स्थिति जवाब देने लगी है और कभी जो फाइलें चलाता था, आज वो खुद फाइलों के चक्कर काट रहा है तथा हर बार विभाग के अधिकारी- बाबू का नया बहाना सवाल लिए खड़ा है। मुरारी लाल बताते हैं कि जिंदगी भर ईमानदारी से दफ्तर की फाइलें आगे बढ़ाई, आज उसी फाइल के लिए अफसरों के कमरे के बाहर बैठना पड़ रहा है। पेंशन भीख नही, वो मेरी खून- पसीने की कमाई है। लेकिन विभाग में कोई बताता ही नही की फाइल अटकी कहां और किस कारण से है। जिसके वजह से मुझे 14 महीने से मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। एक बुजुर्ग जो कल तक विभाग की रीढ़ था, आज दफ्तर- दफ्तर गिड़गिड़ा रहा है। दवाइयों के पैसे नहीं, घर के खर्चे कैसे चलें? क्या फाइलों पर बैठे बाबुओं की इंसानियत मर गई अथवा उन्हें यह पता नही कि वक्त का पहिया घूमता है। आज मुरारी लाल जिस मोड़ पर खड़े हैं, कल उन्हें भी उसी मोड़ से गुजरना है। शिक्षित व्यवस्था में अगर एक वफादार कर्मचारी को पेंशन के लिए 14 महीने तरसना पड़े तो सवाल उठता है- हम किस व्यवस्था का हिस्सा हैं? सिस्टम से थक- हारकर मुरारी लाल डिक्सेना ने अब कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है और उनकी जिला प्रशासन से फरियाद है कि उनके मामले पर तुरंत संज्ञान लेकर उनका हक दिलाएं और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। बहरहाल कलेक्टर को इस मसले पर त्वरित गंभीरता दिखाने की जरूरत है, वरना कल हर सरकारी कर्मचारी को लगेगा कि सेवा करने का इनाम बुढापे में अपमान हैं।

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