Blog

नीम करोली वाले बाबा की स्मृति में पूजा अर्चना भोग भंडारा, महा आरती में श्रद्धालुओं ने लिया भाग,स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग सहित देश के प्रसिद्ध उद्योगपति भी बाबा के भक्त थे

बिलासपुर। नीम करोली बाबा की जयंती स्थापना दिवस पर आज उनके भक्तों ने महा आरती पूजा अर्चना करके भोग प्रसाद का वितरण किया। श्रीकांत वर्मा मार्ग मैग्नेटो मॉल के सामने उनके भक्तगण सतीश सिंह, विकास शुक्ला,, राजू गुप्ता,,सुनील सिंह,कृष्ण मोहन पांडे ,पंकज तिवारी,रंगानादम शाहिद सैकड़ो की तादाद में भक्तों ने यहां पर पूजा अर्चना की तथा भोग प्रसाद का वितरण किया। नीम करोली बाबा के भक्तों ने आज काफी संख्या में यहां पर पहुंचे थे तथा प्रसाद ग्रहण किया। आज के ही दिन नैनीताल में भी बाबा के आश्रम में लाखों की तादाद में भक्त यहां पूजा करने पहुंचते हैं। बताया जाता है कि
नीम करोली वाले बाबा ने 1960 के दशक में नैनीताल के पास ‘कैंची धाम’ आश्रम की स्थापना की. यह स्थान आज भी दुनिया भर के भक्तों का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। बाबा ने अपने जीवन में कई हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया और हमेशा ‘सबको प्यार करो, सबकी सेवा करो’ का संदेश दिया।


नीम करोली बाबा (महाराजजी) एक महान संत थे, जिन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता है. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जन्मे लक्ष्मण नारायण शर्मा ने 17 वर्ष की उम्र में घर त्याग दिया था. एक बार ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करने पर टीटीआई ने उन्हें उतार दिया था, जिसके बाद ट्रेन उनकी आज्ञा के बिना आगे नहीं बढ़ी। इसी घटना के बाद से उन्हें ‘नीम करोली बाबा’ कहा जाने लगा।


भक्तों के अनुसार, बाबा के पास कई सिद्धियां थीं। उनकी एक प्रसिद्ध कहानी ‘बुलेट प्रूफ कंबल’ से जुड़ी है, जहाँ उन्होंने एक भक्त की रक्षा के लिए सर्दियों की रात में खुद को गर्म रखने वाले चमत्कारिक कंबल का इस्तेमाल किया।
उन्होंने अपनी योग शक्तियों से एक बार पानी की बाल्टी में घी भरकर भंडारा भी चलाया था.
बाबा के आध्यात्मिक विचारों ने विदेशियों को भी आकर्षित किया। 1960 के दशक में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु राम दास जी महाराज ने सानिध्य दिया।
बाबा के आध्यात्मिक विचारों ने विदेशियों को भी आकर्षित किया। 1960 के दशक में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु राम दास (रिचर्ड अल्बर्ट) उनके संपर्क में आए बाद में, Apple के संस्थापक स्टीव जॉब्स और Facebook के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भी नीम करोली बाबा के आश्रम का दौरा किया था।
11 सितंबर 1973 को वृंदावन में नीम करोली बाबा ने अपना शरीर त्याग दिया, लेकिन उनके अनुयायी आज भी उन्हें अपने जीवन में गहराई से महसूस करते हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *