नौ गौवंशों की मौत के बाद कार्रवाई पर सवाल,बिना पोस्टमार्टम दफनाए गए शव,गौ सेवा आयोग ने एनएचएआई से मांगा जवाब

बिलासपुर। बिलासपुर-रतनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गतौरी के पास सड़क हादसे में नौ गौवंशों की मौत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के दो दिन बीत जाने के बावजूद वाहन चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने और मृत गौवंशों का पोस्टमार्टम कराए बिना ही उन्हें दफना दिए जाने पर छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग ने नाराजगी जताई है। आयोग ने मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जवाब तलब करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल मंगलवार तड़के गतौरी के पास तेज रफ्तार भारी वाहन मवेशियों के झुंड को कुचलते हुए फरार हो गया था। हादसे में नौ गौवंशों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक नंदी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल नंदी को गौसेवकों ने छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम पहुंचाकर उपचार के लिए भर्ती कराया। पुलिस ने मृत मवेशियों को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया, लेकिन इसके बाद की गई कार्रवाई अब विवाद का विषय बन गई है।
आरोप है कि मृत गौवंशों का पशु चिकित्सा विभाग से पोस्टमार्टम कराए बिना ही उन्हें सड़क किनारे दफना दिया गया। बताया जा रहा है कि एनएचएआई अधिकारियों के निर्देश पर शवों का निस्तारण कर दिया गया, जबकि न तो पशु चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना दी गई और न ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
मामले को गंभीर मानते हुए गौ सेवा आयोग जिला समिति के अध्यक्ष धीरेन्द्र दुबे ने पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त संचालक को निर्देश दिए हैं कि एनएचएआई से यह स्पष्ट किया जाए कि मृत गौवंशों को किसके आदेश पर दफनाया गया, क्या इसकी सूचना पुलिस और पशु चिकित्सा विभाग को दी गई थी तथा पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। साथ ही उन्होंने भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में गौवंश की मृत्यु होने पर पशु चिकित्सा विभाग को अनिवार्य रूप से सूचना देने के लिए एनएचएआई को पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
नियमों के अनुसार क्या होनी चाहिए कार्रवाई
सामान्य प्रक्रिया के अनुसार सड़क दुर्घटना में किसी पशु की मृत्यु होने पर पुलिस को सूचना दी जाती है, पंचनामा तैयार किया जाता है तथा पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाता है। इसके बाद ही शव का विधिवत निस्तारण किया जाता है। यदि दुर्घटना करने वाला वाहन फरार हो जाए तो पुलिस वाहन चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करती है।
एफआईआर दर्ज नहीं होने पर भी सवाल
जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने पहले घटना की सूचना रतनपुर थाना पुलिस को दी थी। क्षेत्राधिकार कोनी थाना होने के कारण सूचना वहां भेजी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वाहन चालक के खिलाफ अपराध दर्ज नहीं किया गया। चर्चा है कि किसी औपचारिक शिकायत के अभाव में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी का तबादला हो गया और उन्होंने नए थाना प्रभारी को कार्यभार सौंप दिया।
तत्कालीन टीआई बोले,मुझे शाम को सूचना मिली थी
तत्कालीन कोनी थाना प्रभारी विवेक पांडेय ने बताया कि शाम को घटना की सूचना थाने में मिली थी। नए थाना प्रभारी को चार्ज देने के बाद वह थाने से रिलीव हो चुके थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि मामले को लेकर कुछ लोग तहसीलदार के साथ थाने जाने वाले थे।
एनएचएआई के डायरेक्टर बोले,सड़क हो रहा था जाम
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मुकेश कुमार परगनिहा ने कहा कि हादसे के बाद मृत मवेशी सड़क पर पड़े थे, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था। इसलिए उन्हें दफनाया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि पोस्टमार्टम कराया गया था या नहीं। उनका कहना है कि उस दिन किसी ने थाने में सूचना नहीं दी थी और अब वे अपनी टीम को भविष्य में ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित विभागों को देने के निर्देश देंगे।
वाहन चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने से खड़े।हुए सवाल
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही, कानूनी प्रक्रिया के पालन और वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस, पशु चिकित्सा विभाग और एनएचएआई इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं।