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बांग्लादेशी नहीं, बंगाल से रोजगार की तलाश में आए थे बिलासपुर

बांग्लादेशी : देश में रहने का 3-4 पीढ़ी पुराना रिकॉर्ड मिला, पश्चिम बंगाल पुलिस ने दी रिपोर्ट

बिलासपुर।रायपुर के होल्डिंग सेंटर से रिहा किए गए 19 लोग बांग्लादेशी नहीं थे। वे पश्चिम बंगाल से रोजगार की तलाश में बिलासपुर आए थे। बिलासपुर पुलिस को पश्चिम बंगाल पुलिस से मिली विस्तृत जांच रिपोर्ट में बताया गया कि जिन 19 लोगों को रिहा किया गया है, उनके परिवार तीन-चार पीढ़ियों से पश्चिम बंगाल के निवासी हैं।जांच में उनके पूरे फैमिली ट्री की पुष्टि हुई है और स्थानीय मतदाता सूची में भी उनके नाम दर्ज मिले हैं। ये सभी बेहद गरीब परिवार से हैं। इनमें से अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, रघुनाथगंज और शमशेरगंज इलाके के रहने वाले हैं। ये लोग रोजी-रोटी की तलाश में छत्तीसगढ़ आए थे। इनमें से कुछ लोग
घर-घर जाकर घरेलू सामान बेचने की फेरी लगाते थे, तो कुछ मजदूरी व अन्य छोटे-मोटे काम करके अपना गुजर-बसर कर रहे थे।

बिना सत्यापन कोई विदेशी नागरिक नहीं

एसएसपी रजनेश सिंह ने इस बारे में बताया कि बिना सत्यापन किसी को विदेशी नागरिक घोषित नहीं किया जा सकता। पुलिस ने पश्चिम बंगाल पुलिस एवं संबंधित अधिकारियों के सहयोग से सत्यापन की प्रक्रिया करवाई। इसमें 9 लोगों के भारतीय नागरिक होने से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड मिलने पर उन्हें होल्डिंग सेंटर से रिहा कर दिया गया है। चार लोगों के दस्तावेज और पहचान का सत्यापन अभी पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्ट के हिसाब से उनके बारे में निर्णय किया जाएगा।

4 लोगों का रिकॉर्ड नहीं मिला, प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार

जिन चार लोगों की नागरिकता को लेकर अब भी संशय बरकरार है, उनका रिकॉर्ड पश्चिम बंगाल पुलिस के प्राथमिक जांच में नहीं मिल सका है। इन चारों के नाम न तो मतदाता सूची में मिले हैं और न ही एसआईआर रिकॉर्ड में हैं। इनके द्वारा प्रस्तुत किए गए पहचान पत्रों का भी स्थानीय स्तर पर सत्यापन नहीं हो पाया है। इसी वजह से इन चार लोगों को फिलहाल रायपुर के होल्डिंग सेंटर में ही रखा गया है। बिलासपुर पुलिस अब पश्चिम बंगाल शासन और संबंधित जिला प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जिला प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही इनकी नागरिकता की स्थिति स्पष्ट होगी और आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।

मूल निवास और दस्तावेज की पुष्टि नहीं होने पर नागरिकता की जांच को आगे बढ़ाया गया

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में इनके मूल निवास और दस्तावेज की पुष्टि नहीं होने के कारण ही इनकी नागरिकता की जांच को आगे बढ़ाया गया था। कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद पश्चिम बंगाल में भी इनके कुछ रिश्तेदार और परिजन डर के कारण अपने घरों से बाहर चले गए थे। इसलिए वस्तुस्थिति का पता नहीं लग सका था।

एसटीएफ बंगाल से खाली लौटी थी

इन सभी को संदिग्ध बांग्लादेशी घोषित करने से पहले बिलासपुर एसटीएफ ने भी पश्चिम बंगाल को खंगाला था। लेकिन वहां इन लोगों से जुड़ा कोई संपर्क वह तलाश नहीं पाई थी। पुलिस की एसटीएफ टीम जब मुर्शीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में इनके बताए पते पर पहुंची तो कई जगह संबंधित व्यक्ति या उनके
परिजन नहीं मिले। स्थानीय स्तर पर भी उनके नाम-पते को लेकर पुलिस को तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। आसपास पूछताछ में भी संबंधित लोगों के वहां रहने की जानकारी नहीं मिली। इसके अलावा कुछ दस्तावेज की प्रामाणिकता भी तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी। स्थानीय प्रशासन से भी अपेक्षित जानकारी नहीं मिलने के
कारण पुलिस के सामने इनकी पहचान और नागरिकता को लेकर संदेह बना रहा। इसी प्रारंभिक जांच के आधार पर 23 लोगों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में 5 सितंबर को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजा गया था। लेकिन अब पश्चिम बंगाल की पुलिस नेइनका पूरा रिकॉर्ड बिलासपुर पुलिस को सुलभ करवा दिया है

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