महंगाई से घर बनाना हुआ महंगा 6 लाख रुपए तक बढ़ी लागत
युद्ध के बाद पेट्रोल-डीजल, गैस की कीमतों में वृद्धि व किल्लत का असर
टाइल्स ने रुलाया, कीमत तो 25 से 30 फीसदी बढ़ी ही स्टॉक भी नहीं, लोग परेशान
सीमेंट, सरिया, सेनेटरी, प्लाईवुड, पेंट के दामों में भारी वृद्धि
बिलासपुर। ईरान-इजराइल युद्ध के चलते आई वैश्विक संकट तथा पेट्रोल-डीजल व गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि और किल्लत ने लोगों के अपने घर के सपने को महंगा कर दिया है। लोगों का घर बनाना 3 से लेकर 6 लाख रुपए तक महंगा हो गया है। सीमेंट, सरिया, प्लाईवुड, पेंट, प्लास्टिक, इलेट्रिरकल वायर समेत निर्माण सामग्रियों की कीमत 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। प्लाईवुड, फेवीकोल से लेकर फर्नीचर निर्माण से जुड़े फिटिंग मटेरियल भी 20 से 25 परसेंट महंगे हो गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी टाइल्स को लेकर आ रही है। इसकी कीमत में 25 से 30 फीसदी वृद्धि तो हुई ही है। स्टॉक की कमी भी बताई जा रही है। गैस की परेशानी के चलते कई टाइल्स निर्माण कंपनियां बंद हो गई है तो कई ने निर्माण आधे कर दिए हैं। वहीं डीजल की शॉर्टेज के चलते सप्लाई चेन टूट गई है। इन सबके बाद अप्रैल माह से बढ़े लेबर चार्ज ने भी मकान निर्माण को महंगा कर दिया है। बिल्डर्स, भवन निर्माण कार्यों में लगे एजेंसियों, सीमेंट, छड़, सेनेटरी आइटम प्लाई, टाइल्स के होलसेलर्स का कहना है ईरान इजराइल युद्ध के बाद में भारी परेशानी आ रही है। बिल्डर्स एवं भवन निर्माण एजेंसियों का कहना है कि निर्माण सामग्री तो महंगे हुए ही हैं। उपलब्धता नहीं होने से भारी परेशानी हो रही है।यही कारण है कि भवन सामग्रियों के साथ ही घर बनाना अब सिर्फ सपना रह गया है और बन भी गया तो वैसा नहीं बन सकेगा जैसा आप चाहते है।बल्कि सपनों को चकनाचूर करने वाली स्थिति बनती जा रही है।
टाइल्स भी डीजल के कारण सप्लाई हुई प्रभावित
घर बनाने के लिए आज सबसे जरूरी वस्तु टाइल्स है। इसकी कीमत ही 25 से 30 फीसदी बढ़ गई है और दुकानों में मनपसंद टाइल्स भी नहीं मिल पा रहे हैं। कमर्शियल गैस की किल्लत और दाम बढ़ने का सीधा असर टाइल्स निर्माण पर पड़ा है। गैस की किल्लत से कई फैक्ट्रियां बंद हो गई। वहीं जब गैस की थोड़ी उपलब्धता शुरू हुई और कुछ फैक्ट्रियों में निर्माण शुरू हुआ तो डीजल संकट शुरू हो गया है। गुजरात के मोरबी से ज्यादातर टाइल्स की सप्लाई होती है। डीजल के चलते सप्लाई अवरूद्ध हो गई है।
प्लाई,फिटिंग मटेरियल की कीमतें बढ़ी
तीन माह में प्लाईवुड, फेवीकोल, माइका, फिटिंग मटेरियल की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। यह वृद्धि ब्रांडेड और लोकल दोनों प्लाई में हुई है। इससे दरवाजे और फर्नीचर ही नहीं घरों के डेकोरेशन का खर्च बढ़ गया है। दरवाजों के हैंडल, कब्जा, कील समेत हाईवेयर आइटम की कीमतें भी लगातार बढ़ रही है।
लेबर चार्ज बढ़े, इलेक्ट्रिक वायर में तेजी
अप्रैल माह से लेबर चार्ज में वृद्धि हुई है। भवन निर्माण पहले 170 से 190 रुपए प्रति फीट लेबर चार्ज किए जा रहे थे। अप्रैल माह से यह बढ़कर 225 रुपए से 250 रुपए प्रति फीट हो गई है। वहीं कॉपर के दाम में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे इलेक्ट्रिक वायर की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है।एल्युमिनियम की कीमत भी डबल हो गई है।
दाम बढ़ने से लेकर युद्ध के बाद कई परेशानियां
वार के बाद भवन निर्माण सेक्टर काफी डिस्टर्ब हुआ है। डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन, समय में सामानों की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है। ऐसे समय में सावधानी के साथ प्लानिंग की जरूरत है। निर्माण कार्यों के दाम तो निश्चित रूप से बढ़ रहे हैं। सरकार को भी निर्माण सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि पर कंट्रोल के लिए ध्यान देना चाहिए।
एल्युमिनियम के दाम बढ़ने से विंडो, डोर, फ्रेम भी महंगे
गैस, डीजल की कीमतों में वृद्धि समेत निर्माण सामग्रियों की कीमतों में तेजी से स्टील, यूपीवीसी, एल्युमिनियम सभी विंडो, डोर, फ्रेम की कीमत 10 से 20 परसेंट तक बढ़ गई है। वृद्धि में पेंट की कीमत और लेबर चार्जेस में बढ़ोतरी की भी अहम भूमिका है। स्टील डोर, विंडो फ्रेम में 10 से 15 फीसदी, यूपीवीसी विंडो में 15 से 20 परसेंट और एल्युमिनियम में 20 से 22 फीसदी की वृद्धि हुई है।
पेंट की कीमतों में 15 से 20 फीसदी का उछाल
घर निर्माण के लिए सबसे जरूरी सीमेंट, रेती, गिट्टी की कीमतें बढ़ गई है। इतना ही नहीं फिनिशिंग आइटम पेंट, सेनेटरी, प्लास्टिक पाइप के दाम भी बढ़ गए हैं। सीमेंट की कीमत फिर से 10 से 15 रुपए बढ़ गई है। रेती-गिट्टी में 10-10 परसेंट, पेंट की कीमत 15 से 20 परसेंट, प्लास्टिक और स्टील पाइप की कीमतें 10-10 प्रतिशत बढ़ गया है।
मजदूर,मिस्त्री और ठेकेदार के भी दाम बढ़े
ठेकदार राकेश कश्यप का कहना है कि महंगाई की वजह से मजदूरों का मिलना मुश्किल हो गया है।अगर कही काम का ठेका लिया गया है तो उसके लिए पहले से मिस्त्री और मजदूरों को बोलना पड़ता है।और पहले उनकी रोजी कम थी और अब महंगाई के कारण उनका भी दाम बढ़ गया है।यही कारण है कि मकान मालिक और भवन निर्माण करने वालो से बढ़े हुए दाम लिए जाते है।