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राजीव गांधी शिक्षा मिशन के फर्नीचर घोटाले में जिला परियोजना समन्वयक,लेखपाल समेत दस आरोपियों के खिलाफ दस साल बाद बीस हजार पन्नों का चालान पेश

अंबिकापुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन के फर्नीचर घोटाले में 10 साल बाद 10 आरोपियों के खिलाफ 20000 पन्नों का चालान पेश किया है। इस घोटाले से शासन को 67 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति हुई थी। भंडार क्रय नियमों की अनदेखी कर फर्नीचर की आपूर्ति की गई और भौतिक सत्यापन से पहले भुगतान किया गया। आठ फर्मों ने कम फर्नीचर दिया और दो फर्मो ने भुगतान लेने के बावजूद किसी स्कूल में आपूर्ति नहीं को।

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो/एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB), छत्तीसगढ़, रायपुर ने अपराध क्रमांक 28/2017 में आज 10 आरोपियों के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अम्बिकापुर में चालान प्रस्तुत किया है। चालान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के अंतर्गत पेश किया गया है।

वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए 2.70 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ था। जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश दिए थे। इनके नाम कुल 2,68,18,838 के चेक 28.03.2011 को जिला मिशन संचालक और जिला परियोजना समन्वयक के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी किए गए। क्रय आदेशों में 20 दिनों के भीतर आपूर्ति की शर्त थी।

समाचार पत्रों में प्रकाशित शिकायतों पर स्कूल शिक्षा विभाग ने दिनांक 20.04.2013 को जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर सरगुजा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने दिनांक 03.06.2013 से 12.06.2013 तक जांच की और दिनांक 19.07.2013 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

समिति ने पाया कि कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद ही चेक देने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर फर्नीचर की आपूर्ति से पहले दिनांक 06.04.2011 से 09.04.2011 के बीच वितरित कर दिए। समिति के अनुसार, यह कार्यवाही पद का दुरुपयोग कर स्वयं और फर्मों को लाभ पहुंचाने तथा शासकीय राशि के गबन की मंशा से की गई थी।

फर्मों ने देयकों के साथ स्कूलवार आपूर्ति की सूची और प्रधान पाठकों की हस्ताक्षरयुक्त पावतियां नहीं दी थीं। भुगतान के बाद भी पावतियां प्राप्त नहीं हुईं। गुणवत्ता की जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों से अनुबंध नहीं कराए गए। तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि भी जमा नहीं कराई गई। वित्त विभाग के निर्देशों में बजट व्यपगत होने से बचाने के लिए अग्रिम आहरण तथा आपूर्ति या सत्यापन के बिना भुगतान को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है।

विवेचना में सामने आया कि एस.पी. पाण्डेय ने दिनांक 18.02.2011 को दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम जारी क्रय आदेश उन्हें देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस, अम्बिकापुर के संचालक संजय पटेल को दिया। उन्होंने संजय पटेल को दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से बैंक खाता खोलने के लिए कहा। संजय पटेल ने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, अम्बिकापुर में इसी नाम से खाता खोला और दिनांक 28.03.2011 का चेक क्रमांक 625255, राशि ₹22,91,909 जमा कर राशि आहरित की। आरोप है कि आदेशित फर्म के स्थान पर इस कथित फर्जी फर्म को भुगतान किया गया। पूछताछ में संजय पटेल ने बताया कि उसने ₹7 लाख कमीशन के रूप में एस.पी. पाण्डेय को दिए और शेष राशि से उसे फर्नीचर की आपूर्ति करने को कहा गया था। इसके बावजूद उसने किसी स्कूल में आपूर्ति नहीं की।

इसी प्रकार, महारानी स्टील एण्ड अप्लायंस, रायपुर के संचालक प्रेमचन्द जैन को दिनांक 28.03.2011 का चेक क्रमांक 625156, राशि ₹11,44,349 दिया गया। राशि आहरित करने के बावजूद उनकी फर्म ने किसी स्कूल में फर्नीचर नहीं दिया। प्रेमचन्द जैन की मृत्यु दिनांक 07.08.2025 को हो चुकी है। शेष आठ फर्मों ने आदेशित मात्रा से कम आपूर्ति की।

फर्मवार गणना में आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि ₹56,84,848, वैट की अंकित राशि ₹9,47,938 और निरीक्षण शुल्क ₹1,15,222.28 का गबन होना पाया गया। इनका कुल योग ₹67,48,008.28 है।

चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय, जो वर्तमान में सेवानिवृत्त हैं, तथा दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल की भूमिका शामिल है। अन्य आरोपी हैं—अम्बिका अलमीरा एण्ड स्टील फेब्रिकेटर्स के संचालक अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की संचालिका ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के संचालक बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील एण्ड वुडन इंडस्ट्रीज के संचालक राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संचालक संदीप तिवारी, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के संचालक हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के संचालक रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संचालक संजीव गुप्ता। आरोप है कि एस.पी. पाण्डेय ने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर शासकीय राशि के गबन के लिए आपराधिक षड्यंत्र और छल किया तथा नियमों का पालन किए बिना आपूर्ति से पहले भुगतान किया।

सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने तथा कथन दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस तामील कराए गए, लेकिन दोनों ने विवेचना में सहयोग नहीं किया। दिनांक 19.08.2026 को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराकर दोनों को गिरफ्तार किया गया। परिजनों को सूचना देने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट, अम्बिकापुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से दिनांक 24.08.2026 तक न्यायिक रिमाण्ड प्राप्त हुआ था।

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