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राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026 में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की सक्रिय सहभागिता

आम की विविधता, अनुसंधान और नवाचार का आकर्षक संगम

रायपुर – क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, सरकंडा, बिलासपुर राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026 में अपनी सक्रिय और प्रभावशाली सहभागिता दर्ज करा रहा है। यह प्रतिष्ठित तीन दिवसीय आयोजन 29 मई से 31 मई 2026 तक कृषि महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित कृषि मंडपम, रायपुर में आयोजित हो रहा है।

इस महोत्सव में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर द्वारा उत्कृष्ट, देशी तथा संकर आम किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही आम उत्पादन, संरक्षण और उन्नत बागवानी तकनीकों से संबंधित नवीनतम कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

आम को “फलों का राजा” कहा जाता है और यह भारतीय कृषि, संस्कृति तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रीय आम महोत्सव जैसे आयोजन किसानों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक साझा मंच प्रदान कर रहे हैं, जहां वे नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और बाजार संभावनाओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

आकर्षण का केंद्र बन रही हैं उन्नत एवं देशी किस्में

क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के प्रदर्शनी स्टॉल में विभिन्न रंग, आकार, स्वाद और सुगंध वाली आम की किस्में आगंतुकों को आकर्षित कर रही हैं। इनमें देशी जैव विविधता से जुड़ी किस्मों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत एवं संकर किस्में भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार स्थानीय किस्मों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनमें जलवायु सहनशीलता तथा प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी महत्वपूर्ण विशेषताएं पाई जाती हैं। बदलते मौसम और बढ़ते तापमान की परिस्थितियों में ऐसी किस्में भविष्य की कृषि सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस

महोत्सव में आम उत्पादन से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान, पौध संरक्षण उपाय, उन्नत ग्राफ्टिंग तकनीक, जैविक पोषण प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण संबंधी जानकारी भी साझा की जा रही है।

किसानों को बताया जा रहा है कि कैसे—

  • गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री का चयन किया जाए,
  • कम पानी में टिकाऊ बागवानी विकसित की जाए,
  • फल गिरने की समस्या को कम किया जाए,
  • तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित की जाए।

इसके अतिरिक्त आम से तैयार होने वाले विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों— जैसे अचार, पल्प, स्क्वैश, कैंडी और सूखे आम उत्पादों— की संभावनाओं पर भी चर्चा की जा रही है, जिससे ग्रामीण उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके।

विद्यार्थियों और किसानों के लिए सीखने का अवसर

यह आयोजन कृषि विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा उद्यमियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है। उन्हें वैज्ञानिकों और बागवानी विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने तथा आधुनिक तकनीकों को समझने का अवसर मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि अनुसंधान तभी सफल माना जाता है जब उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। राष्ट्रीय आम महोत्सव इसी दिशा में अनुसंधान और व्यवहारिक कृषि के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य कर रहा है।

छत्तीसगढ़ में आम उत्पादन की अपार संभावनाएं

छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी आम उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है। राज्य के अनेक क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से आम के वृक्ष पाए जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और बेहतर विपणन सुविधाओं के माध्यम से इसे बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण सुविधाएं और बाजार से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराया जाए, तो आम उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आम प्रेमियों के लिए विशेष आमंत्रण

डॉ.एस.के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, सरकंडा, बिलासपुर द्वारा वैज्ञानिकों, किसानों, विद्यार्थियों, उद्यमियों तथा आम प्रेमियों को प्रदर्शनी स्टॉल पर आने और आम की विविध दुनिया को करीब से देखने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026 केवल स्वाद और आकर्षण का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय कृषि की जैव विविधता, वैज्ञानिक प्रगति और टिकाऊ बागवानी की संभावनाओं का भी जीवंत उत्सव बन रहा है।

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