Blog

सेहत खराब हो रही खेतीहर भूमि की

बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर का खुलासा

बिलासपुर- कितनी बारिश हुई? के साथ अब एक और सवाल उठने वाला है कि मिट्टी उस पानी और उस गर्मी को कितनी देर तक संभाल सकती है ? क्योंकि छत्तीसगढ़ की खेतीहर भूमि की जैविक सेहत लगातार गिर रही है।

घने वन, पर्याप्त वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और समृद्ध जैव विविधता के दम पर धान का कटोरा कहा जाने वाला छत्तीसगढ़, अब बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन के घेरे में है। गर्मी की अवधि बढ़ रही है, तो रातों का तापमान सामान्य से ऊपर जा रहा है। यह इसलिए क्योंकि मिट्टी की नमी धारण क्षमता तेजी से घट रही है।


हुआ यह खुलासा

2001 से 2021 के बीच छत्तीसगढ़ में भूमि- क्षरण, मृदा कार्बन की क्षति और भूमि उपयोग में व्यापक बदलाव का खुलासा हुआ है। इसी प्रकार कई क्षेत्रों में मिट्टी के जैविक पदार्थ और नमी में भारी अंतर की जानकारी सामने आई है। कारणों की तह में जाने पर यह स्पष्ट हुआ है कि अत्यधिक जुताई और अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव के साथ फसल अवशेष खेतों में ही जलाने जैसी गतिविधियों की वजह से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना बिगड़ रही है। कई क्षेत्रों में तो मिट्टी की जल धारण क्षमता खत्म होने की जानकारी भी सामने आई है।


स्वस्थ और अस्वस्थ मिट्टी

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर किए गए अध्ययन में यह पाया गया है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और मिट्टी में नमी की कमी किसानों में चिंता बढ़ा रही है। पर्याप्त कार्बन, जैविक कार्बन और सूक्ष्मजीव तथा फसल अवशेष रहने पर मिट्टी स्पंज की तरह पानी को रोकती है। यह पानी धीरे-धीरे वाष्पित होकर वातावरण को ठंडा रखती है। इसके विपरीत सूखी, कठोर, अत्यधिक गहरी जुताई से मिट्टी कार्बनिक पदार्थ से रहित हो जाती है। तब खेतों का तापमान बढ़ जाता है। आगे चलकर यह तापमान पौधों की जड़ों पर हीट स्ट्रेस जैसे प्रभाव छोड़ता है।


करना होगा यह काम

मिट्टी में जैविक पदार्थ की वृद्धि के लिए गोबर और वर्मी खाद का छिड़काव बढ़ाना होगा। हरी खाद तथा बायोचार जैसे उपाय करने होंगे। मल्चिंग इसलिए जरूरी क्योंकि सूखी घास, पत्तियां और फसल अवशेष मिट्टी की सतह को ढंककर नमी बचाते हैं। यह क्रिया मिट्टी के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। बार-बार जुताई से भी परहेज करना होगा क्योंकि यह क्रिया भी मिट्टी की संरचना को बिगाड़ रही है। एग्रोफोरेस्ट्री दूरगामी परिणाम देते हैं क्योंकि यह व्यवस्था खेतों में छाया, मिट्टी में नमी संरक्षण , कार्बन संचयन और जैव विविधता को बनाए रखने में सक्षम होती है।

वर्जन
मिट्टी की सेहत बचाना ही प्रभावी उपाय

छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और अनियमित वर्षा का प्रभाव केवल वातावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी की जैविक गुणवत्ता पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मिट्टी में जैविक कार्बन, सूक्ष्मजीवों और कार्बनिक पदार्थों की कमी से उसकी जल धारण क्षमता घट रही है, जिससे खेत तेजी से गर्म हो रहे हैं। स्वस्थ मिट्टी प्राकृतिक “कार्बन सिंक” और “स्पंज” की तरह कार्य करती है, जो पानी को लंबे समय तक संचित रखकर तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है। यदि मिट्टी का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में बढ़ती गर्मी, सूखे और कृषि उत्पादकता में गिरावट जैसी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए जलवायु अनुकूल कृषि के लिए मिट्टी को जीवंत बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *