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श्रीकांत वर्मा की 40 वीं पुण्यतिथि मनाई शिवसेना ने

बिलासपुर ।श्रीकांत वर्मा की 40 वी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके प्रतिमा के समक्ष उपस्थित होकर उन्हें बिलासपुर के नागरिकों के द्वारा श्रद्धांजलि एवम पुष्पांजलि अर्पित की गई ।
इस अवसर पर शिव सेना जिला अध्यक्ष महिला रेवती यादव ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि श्रीकांत वर्तमा जी हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर, कवि एवं कथाकार श्रीकांत वर्मा ‘नई कविता’ आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ थे。 उनकी रचनाओं में आधुनिक जीवन की विडंबनाओं, अकेलेपन और राजनीतिक यथार्थ का गहरा और व्यंग्यात्मक चित्रण मिलता है。

श्रीकांत वर्मा पचास के दशक में उभरने वाले ‘नई कविता’ के अत्यंत प्रभावशाली रचनाकार थे。 उनकी कविताओं और कहानियों में समकालीन व्यवस्था, मानवीय संत्रास (अकेलेपन), और सत्ता के क्रूर यथार्थ की सटीक अभिव्यक्ति हुई है。 उन्होंने अपनी भाषा और शिल्प को बेहद सहज लेकिन धारदार रखा।प्रमुख कृतियाँ1. कविता-संग्रहभटका मेघ (1957)मायादर्पण (1967)दिनारम्भ (1967)जलसाघर (1973)मगध (1984)2. कहानी-संग्रहझाड़ीसंवाद3. उपन्यासदूसरी बार4. अन्य विधाएँयात्रावृत्त: अपोलो का रथआलोचना: जिरहसाक्षात्कार: बीसवीं शताब्दी के अँधेरे मेंसम्मान एवं पुरस्कारश्रीकांत वर्मा को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया -उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह ‘मगध’ के लिए उन्हें मरणोपरांत ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया。मध्य प्रदेश शासन द्वारा उन्हें ‘शिखर सम्मान’, ‘तुलसी पुरस्कार’ और ‘आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार’ प्रदान किए गए。उन्हें केरल का ‘कुमारन आशान राष्ट्रीय पुरस्कार’ भी प्राप्त हुआ。पत्रकारिता और राजनीतिक जीवनसाहित्य के साथ-साथ उनका जुड़ाव राजनीति और पत्रकारिता से भी रहा。 उन्होंने ‘दिनमान’ और ‘श्रमिक’ जैसी पत्रिकाओं में एक पत्रकार के रूप में कार्य किया。 वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य भी निर्वाचित हुए थे । बिलासपुर में श्रीकांत वर्मा मार्ग उनके नाम से रखा गया है साथ ही पोस्ट ऑफिस के सामने स्थित आदम क़द प्रतिमा हमारे शहर से जुड़ाव व लगाव को दिखाता है उनके पुत्र जो की एक सफल उद्यमी है और हमारे शिव सेना पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक है के बिलासपुर आगमन पर उनका बिलासपुरिहा प्रेम भी हमने देखा है ।
बिलासपुर शिव सेना पार्टी की ओर से हम उनके पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते है ।

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