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108 किलो वजनी पारदेश्वर महादेव का अखंड रुद्राभिषेक

बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर के सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में विराजमान 108 किलो वजनी दिव्य श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का एक माह का अखंड रुद्राभिषेक एवं वैदिक अनुष्ठान 30 जुलाई से श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ निरंतर जारी है। इस महाअनुष्ठान की पूर्णाहुति श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूर्णाहुति एवं महाआरती के साथ सम्पन्न होगी।
पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि श्रावण मास के दौरान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन नमक-चमक विधि से भगवान श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का अखंड रुद्राभिषेक एवं रुद्रपाठ किया जा रहा है। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि सावन के पावन पर्व पर
प्रतिदिन महारुद्राभिषेक नमक चमक विधि द्वारा किया जा रहा है महाशिवरात्रि महापर्व पर भी प्रयागराज से पधारे विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विशेष वैदिक अनुष्ठान एवं अखंड रुद्राभिषेक सम्पन्न कराया जाता है।, तत्पश्चात 11000 रुद्राक्ष का वितरण किया जाता है, वहीं चैत्र नवरात्रि के अवसर पर बाबा धाम से पधारे विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विशेष रुद्राभिषेक एवं वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। इस प्रकार वर्षभर मंदिर में वैदिक परंपरा के अनुरूप विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं। मंदिर में
स्थापित 108 किलो वजनी श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव की स्थापना महाशिवरात्रि-2023 में परम पूज्य, प्रातः स्मरणीय, शिवस्वरूप ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर श्री 108 स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज की दिव्य प्रेरणा से निर्वाण पीठाधीश्वर विशोकानंद भारती महाराज के पावन सान्निध्य एवं पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई थी। यह पारदेश्वर शिवलिंग छत्तीसगढ़ एवं मध्य भारत के अत्यंत दुर्लभ एवं विशाल पारद शिवलिंगों में से एक
माना जाता है। सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना के अनेक स्वरूप बताए गए हैं, किन्तु पारद शिवलिंग को अत्यंत दुर्लभ, दिव्य एवं चैतन्यमय शिवस्वरूप माना गया है। पारद अर्थात् पारा जिसे शैव आगम, तंत्र एवं रसायन शास्त्र में भगवान सदाशिव का दिव्य तेज कहा गया है।जब पारद का वैदिक एवं रसायनिक विधियों से शोधन, संस्कार एवं बंधन कर शिवलिंग का निर्माण किया जाता है, तब वह पारदेश्वर शिवलिंग कहलाता है। ऐसा शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ होता है और
इसकी स्थापना सिद्ध संतों एवं विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में की जाती है। मंदिर में प्रतिदिन भगवान श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का गंगाजल एवं पंचामृत से अभिषेक, बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा एवं पुष्पों से पूजन तथा ? नमः शिवाय एवं महामृत्युंजय मंत्र का अखंड जाप किया जाता है।

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