अरपा कोल बेनीफिकेशन की जनसुनवाई का सरपंचों और ग्रामीणों ने किया जमकर विरोध….कलेक्टर से बोले,साहब जिंदगी अनमोल है,कोलवाशरी से हो जाएगी बर्बाद

जनसुनवाई हुई तो ग्रामीण करेंगे बड़ा आंदोलन,नहीं खुलने देंगे कोलवाशरी
बिलासपुर । ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सीपत के अध्यक्ष राजेंद्र धीवर ने रलिया-भिलाई में प्रस्तावित अरपा कोल बेनीफिकेशन ग्रीनफील्ड लि. की 2.6 एमटीपीए क्षमता वाली कोलवाशरी परियोजना को क्षेत्र के लिए खतरनाक बताते हुए गुरुवार को रलिया भिलाई क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर बिलासपुर कलेक्टर को पत्र सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। राजेंद्र धीवर ने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि यह परियोजना ग्रामीणों के स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, पर्यावरण, कृषि, धार्मिक आस्था और जीवनशैली पर गंभीर संकट बनकर खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उद्योग नहीं बल्कि हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा और भविष्य को खत्म करने वाला कदम है। इस दौरान धीवर के साथ उमेन्द्र कुर्रे, राजेश्वर साहू, मेघनाथ खांडेकर सहित कई ग्रामो के सरपंच भी शामिल रहे।

ग्रामीणों और सरपंचों ने सौंपा ज्ञापन
जयरामनगर और कोलवाशरी खुलने के आसपास के सरपंचों के एक स्वर में भरपूर विरोध किया।ग्रामीणों और सरपंचों ने कहा कि कोलवाशरी खुलेगा तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जायेगा,कोलवाशरी से किसी को कोई फायदा नहीं है बल्कि नुकसान है।जिसके कारण जिंदगी बर्बाद हो जाती है।जाहिर है ऐसे में होने वाली जनसुनवाई को बंद करके रोक लगाना चाहिए ताकि कोलवाशरी न खुल सके।इसके बाद भी अगर कोलवाशरी खुलता है तो आने वाले दिनों में सीपत और जयरामनगर के पूरे लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धीवर ने पत्र में उठाए गंभीर बिंदु
- स्कूलों पर खतराः भिलाई, रलिया और बेलटुकरी के स्कूल कोलवाशरी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर हैं। धूल और प्रदूषण से बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ेगा।
- जल संकट गहराएगा: सतही जल संसाधन 3 किमी तक उपलब्ध नहीं, जल संकट और विकराल होगा।
- स्वास्थ्य पर मारः फेफड़े, आंख और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा कई गुना बढ़ेगा ।
- खेती चौपटः राख और धूल से कृषि भूमि पर खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
- पर्यावरण का दीर्घकालिक नुकसानः प्रकृति और पर्यावरण पर गहरा असर पड़ेगा ।
- एनटीपीसी राखड़ डेम पर असरः परियोजना स्थल से महज 1 किमी दूरी पर होने से राखड़ डेम और वाहनों का दबाव और बढ़ेगा।
- पहले से कोलवाशरी का बोझः 2 किमी दायरे में पहले से 4 कोलवाशरी और रेल्वे साइडिंग मौजूद हैं, ग्रामीण पहले से प्रदूषण झेल रहे हैं।
- जनसंख्या पर असरः लगभग 70 से 80 हजार ग्रामीण सीधे प्रभावित होंगे।
- धार्मिक आस्था को चोटः राउतराय मंदिर कोलवाशरी स्थल से महज 10 मीटर पर है, जिसका अस्तित्व खतरे में आ जाएगा।
- गेल इंडिया पाइपलाइन पर बड़ा खतराः 500 मीटर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछी है, दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहेगी।
- नहर-नाले प्रभावितः सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह बाधित होगी, किसानों को निस्तारी की समस्या होगी।
- कृषि भूमि का अवैध उपयोगः भूमि का उपयोग परिवर्तन किए बिना औद्योगिक प्रयोजन हेतु अधिग्रहण किया गया है।
ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर, प्रोजेक्ट तत्काल रद्द हो : राजेंद्र धीवर
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सीपत के अध्यक्ष राजेंद्र धीवर ने कहा कि कोलवाशरी से सिर्फ प्रदूषण और बीमारी मिलेगी, रोजगार नहीं। यह परियोजना क्षेत्र के हजारों लोगों की सांसों पर बोझ बनकर आ रही है। यदि इसे रोका नहीं गया तो ग्रामीणों के साथ कांग्रेस पार्टी सडक़ पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी