अफीम-गांजा की अवैध खेती रोकने प्रशासन ने कसी है कमर
गांव-गांव में जांच के बाद नहीं मिला अब तक अफीम गांजा खेती करने की सूचना
कलेक्टर ने तहसीलदार, पटवारी और सचिवों को गांव-गांव जांच के दिए थे निर्देश
बिलासपुर। प्रदेश के अन्य जिलों में अफीम और गांजा की अवैध खेती के चौंकाने वाले मामले सामने आने के बाद अब बिलासपुर जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। शासन से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर ने जिले में अफीम और अन्य नशीले पोधों की अवैध खेती को लेकर सख्त रुख अपनाया है।इसके लिए उन्होंने टीम का गठन कर जांच करने के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक जांच के कही से अवैध अफीम और गांजा की खेती करने की खबर नहीं मिली है।
दरअसल कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए हैं कि जिले के किसी भी हिस्से में नशे का यह काला कारोबार पनपने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए तहसीलदार, पटवारी और ग्राम सचिवों को गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे । टीम संदिग्ध फसलों की पहचान कर रही है और जहां भी शक होगा, वहां तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी। जरूरत पड़ने पर ग्राम सरपंचों और सामाजिक संगठनों की मदद भी ली जाएगी।लगभग 1 महीने होने के बाद भी अब तक कही पर भी अफीम और गांजा की खेती करने की खबर नहीं मिली है।जिससे प्रशासन की चिंता कम नजर आ रही है।
खेतों के बीच छिपकर की जा रही अवैध खेती
दरअसल, हाल ही में दुर्ग और बलरामपुर जिलों में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। जांच में यह बात सामने आई कि शातिर अपराधी सामान्य खेती के बीच छिपाकर अफीम की फसल लगा रहे थे, ताकि किसी को आसानी से शक न हो। इसी को देखते हुए अब प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों को सतर्क रहने और अपने-अपने क्षेत्रों में जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। बिलासपुर में भी प्रशासन ने केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय मौके पर जाकर सत्यापन करने की रणनीति बनाई है।
जंगल और शहर से दूर खेती करने वाले क्षेत्र पर है विशेष नजर
प्रशासन ने तहसीलदारों की टीम को विशेष रूप से उन क्षेत्रों में भेजने का निर्णय लिया है जहां बाहरी लोग खेती कर रहे हैं या जो इलाके वन क्षेत्र से सटे हुए हैं। इन स्थानों पर अवैध खेती की आशंका ज्यादा मानी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खेतों का निरीक्षण कर फसल की प्रकृक्ति की जानकारी लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
हर सप्ताह दे रहे है फसल की रिपोर्ट, नहीं बख्शे जाएंगे कर्मचारी
प्रशासन ने मैदानी अमले को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में फसल चक्र की नियमित निगरानी करें और हर सप्ताह उसकी रिपोर्ट अपडेट कर जिला प्रशासन को भेजें। यदि किसी क्षेत्र में अवैध खेती मिली और पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई. तो इसे संबंधित कर्मचारी की मिलीभगत माना जाएगा।इससे कर्मचारी पर गाज गिरेगी और कार्रवाई भी होगी।
जिले के अवैध अफीम और गांजा की खेती वाकई में नही या फिर जांच सिर्फ हवा हवाई
सूत्र बता रहे है कि भारी गर्मी और तपती धूप के बीच क्षेत्र में जाकर निरीक्षण करना बहुत मुश्किल है।हो सकता है कई पटवारी और तहसीलदार जाकर क्षेत्र का भ्रमण किए भी होंगे,और कई लोग ग्रामीणों और कोटवार के भरोसे भी
खेती का निरीक्षण किए होंगे।लेकिन इसमें सवाल यह है कि क्या वाकई में कलेक्टर के आदेश पर नीचे स्तर के अधिकारी बारीकी से जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे या फिर सिर्फ दिखावा रहेगा और जिला प्रशासन को बिना जांच किए ही जांच रिपोर्ट सौंप देंगे।
कलेक्टर बोले,अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है। यदि किसी गांव या खेत में अफीम या गांजा की खेती पाई जाती है, तो वहां के संबंधित पटवारी और ग्राम सचिव की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि
किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जानकारी छिपाने या लापरवाही बरतने की बात सामने आती है, तो उसके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई जा सकती है। साथ ही गंभीर मामलों में निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की जाएगी।