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मुंगेली शिक्षा विभाग में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’: प्राचार्य ने DEO के आदेश को किया दरकिनार कलेक्टर के सुशासन के दावों पर उठे गंभीर सवाल!

मुंगेली। कहते हैं सरकारी तंत्र में साहब का हुक्म सिर माथे पर होता है, लेकिन मुंगेली के शिक्षा विभाग में तो गंगा ही उल्टी बह रही है। यहाँ एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य ने अपने ही विभाग के सबसे बड़े जिला अधिकारी (DEO) के लिखित आदेश को रद्दी का टुकड़ा समझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया है। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य और जन सूचना अधिकारी का यह रवैया मुंगेली जिला प्रशासन और कलेक्टर के ‘सुशासन व पारदर्शिता’ के दावों को खुली चुनौती दे रहा है, जिसकी गूंज अब राजधानी तक सुनाई देने लगी है।

सवाल सीधा है– क्या मुंगेली शिक्षा विभाग में बैठे मातहत अफसर बेलगाम हो चुके हैं, या फिर उन्हें अपने सीनियर अधिकारियों के आदेशों की कोई परवाह ही नहीं है?

DEO साहब ने आदेश दिया, पूरा मामला सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़ा है। एक व्याख्याता के शैक्षणिक दस्तावेजों और नियुक्ति की जानकारी मांगी गई थी। शुरुआत में तो प्राचार्य महोदय ने “निजता का हवाला” देकर जानकारी छुपाने की कोशिश की। जब मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी यानी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के दरबार में पहुंचा, तो DEO मुंगेली ने आदेश क्रमांक 2455 (दिनांक 30 अप्रैल 2026) जारी कर साफ-साफ कहा– “10 दिनों के भीतर आवेदक को सारे दस्तावेज मुफ्त में उपलब्ध कराएं।”

लेकिन मजाल है कि प्राचार्य की कुर्सी पर बैठे अधिकारी के कान पर जूं तक रेंगी हो! आदेश का पालन करना तो दूर, 5 मई को उल्टे ‘थर्ड पार्टी’ का पेंच फंसाकर पूरे आदेश को दरकिनार कर दिया गया। यह सीधे तौर पर जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश की घोर अवहेलना और आम जनता के कानूनी अधिकारों का मखौल उड़ाना नहीं तो और क्या है?

कलेक्टर के ‘सुशासन’ पर सबसे बड़ा सवालिया निशान एक तरफ मुंगेली कलेक्टर लगातार विभागों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, अधिकारियों को समयबद्धता और पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रहे हैं। लेकिन उन्हीं के नाक के नीचे शिक्षा विभाग के अधिकारी कलेक्टर के इस ‘सुशासन अभियान’ की हवा निकाल रहे हैं।

बड़ा सवाल: जब एक मातहत प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रथम अपीलीय अधिकारी) के स्पष्ट आदेश को सरेआम नजरअंदाज कर सकता है, तो फिर आम नागरिक इस सरकारी व्यवस्था और RTI कानून पर भरोसा कैसे करे? क्या मुंगेली में अब अफसरों के आदेश सिर्फ ‘कागजी औपचारिकता’ बनकर रह गए हैं

शिक्षा मंत्री और कलेक्टर साहब, अब तो संज्ञान लीजिए! इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस अड़ियल रवैये को लेकर भारी आक्रोश है।
कलेक्टर मुंगेली से मांग: जनता पूछ रही है कि आदेश की अवहेलना करने वाले ऐसे लापरवाह और नियमों को ताक पर रखने वाले अधिकारियों पर कलेक्टर साहब का ‘प्रशासनिक हंटर’ कब चलेगा?

शिक्षा मंत्री से गुहार: सूबे के शिक्षा मंत्री को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर यह संदेश जाए कि सरकार नियमों से चलती है, किसी अधिकारी की मनमर्जी से नहीं।
DEO की खामोशी पर सवाल: अपनी ही कलम से जारी आदेश की धज्जियां उड़ते देख जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अब तक खामोश क्यों हैं? क्या उनके पास अपने आदेश का पालन कराने की प्रशासनिक शक्ति भी नहीं बची अब राज्य सूचना आयोग में खिंचेगी ‘खाट’ सूत्रों के मुताबिक, विभागीय स्तर पर मिल रहे इस धोखे और टालमटोल के बाद अब आवेदक पूरे मामले को राज्य सूचना आयोग, रायपुर ले जाने की तैयारी में है। अगर यह मामला आयोग पहुंचा, तो मुंगेली शिक्षा विभाग की किरकिरी होना तय है। तब जवाबदेही तय होगी, कानूनन भारी-भरकम जुर्माना भी लगेगा और विभागीय जांच की आंच में कई कुर्सियां झुलसेंगी।

देखना अब यह है कि खुद को ‘अनुशासित’ बताने वाला मुंगेली का प्रशासनिक अमला इस खुली मनमानी का जवाब सख्त कार्रवाई से देता है, या फिर हमेशा की तरह गहरी नींद में सोया रहता है!

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