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स्वर्ण जयंती नगर में अवैध निर्माण हटाने पहुंचा निगम, चार घंटे हंगामा,सिर्फ दीवार तोड़ी, सात दिन की मोहलत

मकान मालिक बोला- न नोटिस मिला, न सीमांकन हुआ

निगम का दावा- पहले ही तीन नोटिस जारी किए जा चुके

बिलासपुर। स्वर्ण जयंती नगर में कथित अवैध निर्माण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम शुक्रवार को पूरी कार्रवाई किए बिना लौट गई। करीब चार घंटे तक चले हंगामे और विरोध के बीच निगम के बुलडोजर ने निर्माण की बाहरी दीवार का कुछ हिस्सा ही तोड़ा। बाद में मकान मालिक अनुप सिंह के अनुरोध पर निगम ने अतिक्रमण स्वयं हटाने के लिए सात दिन का समय दे दिया।

कार्रवाई के दौरान नोटिस और जमीन के सीमांकन को लेकर निगम अधिकारियों तथा मकान मालिक के परिजनों के बीच विवाद हुआ। विरोध के दौरान निगम कर्मचारियों और भवन मालिक के परिजनों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल मौके पर तैनात रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, निगम की टीम जेसीबी लेकर निर्माण हटाने पहुंची तो मकान मालिक के परिवार के सदस्य बुलडोजर के सामने खड़े हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। परिवार का कहना था कि उन्हें निर्माण हटाने के संबंध में कोई नोटिस नहीं दिया गया है।
सूचना मिलने पर दोपहर करीब एक बजे भवन अधिकारी अनुपम तिवारी मौके पर पहुंचे। काफी विरोध के बीच निगम की टीम ने चारदीवारी की कुछ ईंटें हटाईं। इसके बाद भी परिवार का विरोध जारी रहा। इसी दौरान मकान मालिक अनुप सिंह ने स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए सात दिन का समय मांगा। निगम अधिकारियों ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए तत्काल कार्रवाई रोक दी।

नोटिस को लेकर आमने-सामने निगम और भवन मालिक

कार्रवाई के दौरान मकान मालिक के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना के तोड़फोड़ के लिए निगम की टीम पहुंच गई। भवन मालिक का कहना है कि पूर्व में मिले नोटिस का जवाब दिया जा चुका है। उनके मुताबिक, आवेदन देने के बावजूद जमीन का सीमांकन नहीं कराया गया और सीमांकन किए बिना ही निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित पक्ष को पहले ही तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निगम के अनुसार, सरकारी जमीन पर किए गए कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

हाईटेंशन लाइन के करीब पहुंच गई थी दीवार

मामला वार्ड-19 के कस्तूरबा नगर स्थित स्वर्ण जयंती कॉलोनी का है। यहां सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण किए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि निर्माण की वजह से हाईटेंशन बिजली लाइन दीवार के बेहद करीब आ गई थी।हाल ही में इसी क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद हाईटेंशन लाइन के आसपास किए गए निर्माण को हटाने की मांग तेज हुई थी। इसी क्रम में निगम की टीम शुक्रवार को कार्रवाई के लिए पहुंची थी।

चार घंटे के हंगामे के बाद लौटी टीम

कार्रवाई को लेकर सुबह से ही मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। परिवार के सदस्यों द्वारा विरोध किए जाने के बाद निगम और पुलिस की मौजूदगी में समझाइश का दौर चलता रहा। तोड़फोड़ के दौरान महिलाओं और युवती द्वारा भी विरोध किए जाने की बात सामने आई। कुछ समय के लिए निगम कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

अंततः मकान मालिक द्वारा सात दिन में स्वयं अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिए जाने के बाद निगम ने तत्काल कार्रवाई रोक दी। इसके बाद पुलिस बल भी मौके से लौट गया। जानकारी के अनुसार, मकान मालिक ने लिखित पंचनामा पर हस्ताक्षर नहीं किए।

हादसे के बाद दो दिन तक फाइल घूमती रही

सूत्रों के मुताबिक, मजदूरों की मौत के बाद संबंधित निर्माण पर कार्रवाई की फाइल करीब दो दिन तक जोन कार्यालय और भवन शाखा के बीच घूमती रही। इसके बाद निगम ने कार्रवाई की तैयारी की। शुक्रवार को टीम मौके पर पहुंची, लेकिन विरोध के कारण पूरी कार्रवाई नहीं हो सकी।

निगम के सर्वे में 977 अवैध निर्माण चिन्हित

नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने सभी आठ जोन आयुक्तों से अवैध निर्माणों का सर्वे कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए थे। निगम के प्रारंभिक सर्वे में अब तक 977 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक विस्तृत सर्वे के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

चिह्नित निर्माणों में सरकारी जमीन पर कब्जे और बिना स्वीकृत नक्शे के किए गए निर्माण के मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं। निगम का कहना है कि सर्वे के आधार पर नियमानुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।

बिजली लाइन को देखते हुए रोकी कार्रवाई

भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि मकान मालिक ने अतिक्रमण हटाने के लिए सात दिन का समय मांगा है। कार्रवाई के दौरान हाईटेंशन बिजली तार को नुकसान पहुंचने की आशंका थी, इसलिए फिलहाल तोड़फोड़ रोक दी गई है। निर्धारित समय के बाद निगम आगे की कार्रवाई करेगा।

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