कांग्रेसियों ने भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर आज़ादी के लिए दिए गए बलिदान पर किया वीर क्रन्तिकारीयों को याद

गाँधी के “करो या मरो” नारा को बताया स्वतंत्रता का निर्णायक मोड़
बिलासपुर।ज़िला कांग्रेस कमेटी शहर/ग्रामीण द्वारा सुबह 10 बजे कांग्रेस भवन बिलासपुर मे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के स्मृति दिवस पर भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारी अमर शहीदों के बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
उक्त कार्यक्रम मे कार्यक्रम के संयोजक सैयद जफर अली हरीश तिवारी विनोद साहू जितेंद्र पांडे गौरव एडी सत्यम तिवारी माधव एट तलवार राकेश शर्मा प्रकाश देवरस एवं डॉ राहुल सिंह ने बताया कि
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ था, जिसकी शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे (अब मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान (अगस्त क्रांति मैदान) से की गई थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत से ब्रिट ब्रिटिश साम्राज्य को पूरी तरह समाप्त करना था। इसी आंदोलन के दौरान गांधीजी ने देश को “करो या मरो”, “अंग्रेजो भारत छोड़ो”का ऐतिहासिक नारा दिया था.
आंदोलन की घोषणा के तुरंत बाद (9 अगस्त की सुबह) ब्रिटिश सरकार ने ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ के तहत गांधीजी, जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेताओं को जेल में डाल दिया। नेतृत्व की अनुपस्थिति के बावजूद, देश की जनता खुद सड़कों पर उतर आई और आंदोलन ने एक हिंसक और व्यापक रूप ले लिया।
अरुणा आसफ अली ने ग्वालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर आंदोलन को गति दी, जिसके कारण उन्हें आंदोलन की ‘ग्रैंड ओल्ड लेडी’ कहा जाता है। उषा मेहता ने भूमिगत रेडियो स्टेशन चलाकर क्रांति का प्रचार किया। देश के कई हिस्सों जैसे उत्तर प्रदेश के बलिया, महाराष्ट्र के सतारा और बंगाल के मिदनापुर में लोगों ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंककर अपनी स्थानीय सरकारें स्थापित कीं। ब्रिटिश सरकार ने बल प्रयोग करके, लाठीचार्ज और सामूहिक गिरफ्तारियों के माध्यम से इस आंदोलन को दबाने का प्रयास किया, जिसे तत्कालीन वायसराय लिनलिथगो ने “1857 के बाद का सबसे गंभीर विद्रोह” माना था। हालांकि इस आंदोलन को तुरंत पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिली, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि अब भारत पर लंबे समय तक शासन करना अंग्रेजों के बस की बात नहीं है। इस जन-आंदोलन ने वर्ष 1947 में भारत की आजादी की नींव को बेहद मजबूत कर दिया था।
उक्त कार्यक्रम में सैयद जफर अली, हरीश तिवारी, माधव ऊतलवार, जितेंद्र पांडे, राकेश शर्मा, विनोद साहू, प्रकाश देवरस, सुभाष ठाकुर, हरमेन्द्र शुक्ला, गौरव ऐरी, राहुल ठाकुर, मो अयूब , राजेश शर्मा, त्रिभुवन कश्यप, सत्तेंद्र तिवारी, वीरेंद्र सारथी, सुरेंद्र तिवारी, गणेश रजक,चंदन सिंह, ईश्वर वैष्णव, राजू यादव, संतोष पीपलवा, सैय्यद मकसूद, अन्नपूर्णा ध्रुव, प्रेमदास मानिकपुरी आदि अनेक कांग्रेसजन उपस्थित रहे।