बाहर मकान, अंदर दुकान,आवासीय टैक्स पर चल रहा कारोबार
8 हजार संपत्तियों का आवासीय नक्शा, उपयोग व्यावसायिक
निगम को हर साल करीब 4 करोड़ के राजस्व का नुकसान
बिलासपुर। नगर निगम के 70 वार्डों में मकानों के व्यावसायिक उपयोग और आवासीय टैक्स की वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। कहीं घर के सामने दुकान निकाल ली गई है, तो कहीं आवासीय भवन में ऑफिस, क्लीनिक, कोचिंग सेंटर और अन्य कारोबार संचालित हो रहे हैं। कई जगह पूरे मकान को हॉस्टल में बदल दिया गया है, लेकिन निगम के रिकॉर्ड में इन संपत्तियों का उपयोग अब भी आवासीय दर्ज है। इसके चलते निगम को हर साल करीब 4 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
नगर निगम द्वारा करीब डेढ़ लाख मकानों के सर्वे में लगभग 8 हजार ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं, जिनका नक्शा आवासीय है, लेकिन उनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। आंकड़ा सामने आने के बाद निगम अब इन संपत्तियों का फिजिकल वेरिफिकेशन करा रहा है। जांच में व्यावसायिक उपयोग की पुष्टि होने पर संबंधित संपत्तियों से बिल्डिंग परमिशन की तारीख से पेनल्टी समेत कमर्शियल टैक्स वसूला जाएगा।
आवासीय नक्शे पर दुकान से लेकर ऑफिस तक
शहर की कई कॉलोनियों में यह स्थिति देखने को मिल रही है। लोग 1000 से 2000 वर्गफीट के मकान का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए पास कराते हैं। निर्माण पूरा होने के बाद मकान के सामने दुकान निकाल लेते हैं। कहीं किराना और मेडिकल दुकान संचालित हो रही है, तो कहीं मोबाइल दुकान, ऑफिस, क्लीनिक, कोचिंग सेंटर या अन्य कारोबार चल रहा है।
समस्या यह है कि भवन का उपयोग बदलने के बाद निगम के राजस्व रिकॉर्ड में संपत्ति का वर्गीकरण नहीं बदला जाता। नतीजा यह है कि व्यावसायिक गतिविधि से कमाई तो व्यावसायिक दर से हो रही है, लेकिन निगम को टैक्स आवासीय दर पर मिल रहा है।
निगम को मिलना चाहिए 126 करोड़, प्रॉपर्टी टैक्स करीब 46 करोड़
नगर निगम के 70 वार्डों से सालाना करीब 126 करोड़ रुपए का कुल टैक्स मिलना चाहिए। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स का हिस्सा करीब 46 करोड़ रुपए है। इसमें लगभग 26 करोड़ रुपए आवासीय और 20 करोड़ रुपए कमर्शियल टैक्स शामिल हैं। ऐसे में 8 हजार संपत्तियों के आवासीय से व्यावसायिक उपयोग में होने के बावजूद कमर्शियल टैक्स नहीं मिलने से निगम के राजस्व पर बड़ा असर पड़ रहा है।
आवासीय टैक्स करीब 2500, कमर्शियल होने पर 5000 तक
करीब 1000 वर्गफीट की किसी संपत्ति पर आवासीय उपयोग के हिसाब से सालाना टैक्स करीब 2500 रुपए बैठता है। वहीं वही संपत्ति व्यावसायिक उपयोग में आने पर टैक्स और यूजर चार्ज मिलाकर राशि करीब 5000 रुपए तक पहुंच सकती है। यानी उपयोग बदलने के बाद निगम की सालाना वसूली करीब दोगुनी हो सकती है।8 हजार संपत्तियों पर इसका असर देखा जाए तो निगम के राजस्व में होने वाले अंतर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कोनी में घर बने हॉस्टल,रिकॉर्ड में अब भी आवासीय
सर्वे में सबसे ज्यादा मामले कोनी क्षेत्र में सामने आने की जानकारी है। यहां बड़ी संख्या में आवासीय मकानों को हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया है। कई इलाकों में एक के बाद एक मकानों में छात्रों के रहने की व्यवस्था की गई है। मकान मालिकों को किराये से नियमित आय हो रही है, लेकिन निगम के रिकॉर्ड में संपत्ति अब भी आवासीय दर्ज है।
मामला केवल संपत्ति कर तक सीमित नहीं है। आवासीय भवन को हॉस्टल या अन्य व्यावसायिक उपयोग में बदलने से भवन का स्वीकृत उपयोग, पार्किंग, पानी, कचरा प्रबंधन और अन्य यूजर चार्ज जैसी व्यवस्थाएं भी प्रभावित होती हैं। व्यावसायिक श्रेणी में आने पर निगम की वसूली बढ़ने के साथ इन सुविधाओं का हिसाब भी अलग तरीके से किया जा सकता है।
हर वार्ड में एआरआई, फिर 8 हजार संपत्तियां कैसे बचीं
नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में एआरआई
संपत्तियों और टैक्स रिकॉर्ड की निगरानी करता है। किस भवन का उपयोग आवासीय है, कौन सा कमर्शियल है और कहां उपयोग में बदलाव हुआ है, इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने आनी चाहिए।
ऐसे में सर्वे में करीब 8 हजार संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग की जानकारी सामने आने से निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि ये संपत्तियां लंबे समय से व्यावसायिक उपयोग में थीं तो समय रहते इनका टैक्स वर्गीकरण क्यों नहीं बदला गया, इसकी भी जांच की जरूरत है।
बिल्डिंग परमिशन की तारीख से लगेगा कमर्शियल टैक्स
नगर निगम के अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि सर्वे पूरा हो चुका है और वर्तमान में संपत्तियों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 8 हजार मकानों का व्यावसायिक उपयोग सामने आया है। जांच में व्यावसायिक उपयोग की पुष्टि होने पर बिल्डिंग परमिशन की तारीख से पेनल्टी के साथ कमर्शियल टैक्स की वसूली की जाएगी।
वर्जन
सर्वे कर लिया गया है जल्द ही नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू के जाएगी और टैक्स बढ़ाया जाएगा।
खजांची कुम्हार
उपायुक्त नगर निगम