महामाया मंदिर के साथ 30 किमी तक के पर्यटन स्थलों का बनेगा मास्टर प्लान…शक्तिपीठपरियोजना से बदलेगी रतनपुर की तस्वीर

महामाया मंदिर के कॉरिडोर में शामिल होने के बाद विकास की नई तैयारी
प्रशासन ने बुलाई अहम बैठक,पर्यटन से रोजगार तक पर मंथन
बिलासपुर। मां महामाया की नगरी रतनपुर के विकास को लेकर बड़ी कवायद शुरू हो गई है। राज्य सरकार की शक्तिपीठ परियोजना के तहत मां महामाया देवी मंदिर को कॉरिडोर में शामिल किए जाने के बाद अब मंदिर तक ही विकास सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके आसपास के 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले पर्यटन स्थलों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की तैयारी है।
इसी सिलसिले में बुधवार को महामाया धर्मशाला में जिला कलेक्टर के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महामाया मंदिर क्षेत्र के विकास, पर्यटन स्थलों के संरक्षण और विकास तथा क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से बेहतर बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शक्तिपीठ परियोजना का लाभ केवल मां महामाया मंदिर तक सीमित न रहे। मंदिर के आसपास मौजूद पर्यटन स्थलों को भी चिन्हित कर उनका विकास किया जाए, ताकि रतनपुर को एक व्यापक धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों के बीच क्षेत्र के विकास को लेकर विभिन्न सुझावों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि रतनपुर सहित आसपास के तमाम पर्यटन स्थलों का मास्टर प्लान तैयार कर राज्य शासन को भेजा जाएगा।
बैठक में नगरपालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप, मंदिर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अरुण शर्मा, नायब तहसीलदार अंकित सिंह, ऋषभ सिंह, सीएमओ सुखसागर खूंटे, ट्रस्टी रितेश आहूजा, चेतनधर दीवान, शैलेन्द्र जाय और पटवारी दिलीप परस्ते सहित विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा एल्डरमैन संतोष यादव, रुद्र गुप्ता, शंकर पटेल, लक्ष्मी कश्यप, केआर कौशिक, संतोष शर्मा, ज्वाला कौशिक, प्रशांत यादव, संजय सोनी, आनंद पाठक, योगेश अग्रवाल और जितेंद्र कश्यप सहित अनेक गणमान्य नागरिक बैठक में उपस्थित रहे।
अब मास्टर प्लान पर निगाहें
शक्तिपीठ परियोजना के तहत महामाया मंदिर के कॉरिडोर में शामिल होने के बाद रतनपुर के विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। अब प्रशासन द्वारा तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान में आसपास के पर्यटन स्थलों को किस तरह शामिल किया जाता है और राज्य शासन स्तर से इसके लिए क्या रूपरेखा तय होती है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
यानी महामाया मंदिर के विकास के साथ अब रतनपुर के आसपास का पूरा पर्यटन क्षेत्र भी विकास के नक्शे पर लाने की तैयारी है।