पचपेड़ी पुलिस पर जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी को छोड़ने का आरोप
पीड़ित ने आईजी-एसएसपी से की शिकायत
आरोपी की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा की मांग
डीजीपी को भी भेजा ज्ञापन
बिलासपुर। पचपेड़ी थाना पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। तोरवा निवासी 21 वर्षीय पीयूष गंगवानी ने आईजी और एसएसपी को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जानलेवा हमला कर मोबाइल और नकदी लूटने के मामले के मुख्य आरोपी नरेंद्र मोटवानी को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद थाने से ही छोड़ दिया, जबकि दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पीड़ित ने खुद और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है। शिकायत की प्रति डीजीपी को भी भेजी गई है।
शिकायत के अनुसार 9 जुलाई की रात करीब 8 बजे पीयूष अपने बड़े भाइयों संदीप और संस्कार गंगवानी के साथ सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने पर पचपेड़ी थाना जा रहे थे। ग्राम बिनौरी के पास रास्ता पूछने के लिए वे रुके थे। इसी दौरान नरेंद्र मोटवानी, लिकू मधुकर और अन्य लोगों ने कथित रूप से बेल्ट, कड़े और धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया।
पीयूष के अनुसार वह किसी तरह वहां से भागकर डायल 112 को सूचना देने में सफल रहा, जबकि हमलावरों ने उसके दोनों भाइयों के मोबाइल फोन और जेब में रखी नकदी लूट ली। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और लिकू मधुकर को पकड़कर पुलिस के हवाले किया।पीड़ित का आरोप है कि पचपेड़ी थाने में उन्हें देर रात करीब ढाई बजे तक बैठाकर रखा गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने जानलेवा हमले की कार्रवाई करने के बजाय केवल लूट के मामले में बीएनएस की धारा 309 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया।
पीयूष के मुताबिक 11 जुलाई को पुलिस ने नरेंद्र मोटवानी और सुमित टंडन को भी पकड़ा था। आरोप है कि इसके बाद लिकू मधुकर और सुमित टंडन को जेल भेज दिया गया, लेकिन मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे नरेंद्र मोटवानी को थाने से ही छोड़ दिया गया।पीड़ित ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नरेंद्र मोटवानी को तत्काल गिरफ्तार करने और खुद तथा परिवार के सदस्यों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। आरोपों के चलते पचपेड़ी पुलिस की कार्रवाई और मामले में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।