Blog

सीयू के सुरक्षा गार्डों ने लगाया वेतन घोटाले का आरोप, श्रम आयुक्त से की शिकायत

बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही निजी कंपनी इगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड पर सुरक्षा गार्डों के वेतन भुगतान में गंभीर अनियमितता के आरोप लगे हैं। 180 से अधिक सुरक्षा गार्डों और सुरक्षा अधिकारियों ने कंपनी पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान करने का आरोप लगाते हुए क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है।

गार्डों का आरोप है कि कंपनी उनसे 18,593 रुपए मासिक वेतन प्राप्ति के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाती है, जबकि उनके बैंक खातों में केवल 13 हजार रुपए ही जमा किए जाते हैं। इस तरह प्रति कर्मचारी करीब 5,593 रुपए की राशि कम भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में कंपनी के माध्यम से 180 से अधिक सुरक्षा गार्ड एवं सुरक्षा अधिकारी कार्यरत हैं। उनका कहना है कि 26 दिनों की ड्यूटी के एवज में कागजों में पूरा वेतन दर्शाया जाता है, लेकिन वास्तविक भुगतान कम किया जा रहा है। इसे श्रमिकों के अधिकारों, वेतन संहिता-2019 तथा न्यूनतम मजदूरी नियमों का उल्लंघन बताया गया है।
श्रम आयुक्त को सौंपे गए शिकायत पत्र में वेतन रजिस्टर, उपस्थिति पंजी, बैंक भुगतान विवरण और विश्वविद्यालय को प्रस्तुत किए गए बिलों की जांच कराने की मांग की गई है। गार्डों ने आरोप लगाया है कि यदि दस्तावेजों का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है ।
वहीं, इगल हंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड के सुपरवाइजर अखिलेश सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि सुरक्षा गार्डों के वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) के लिए लगभग 3,600 रुपए तथा ईएसआईसी के लिए करीब 500 रुपए की कटौती की जाती है। इसके अलावा अन्य वैधानिक और संचालन संबंधी खर्च भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी भुगतान और कटौतियां नियमानुसार की जा रही हैं।

मामले पर विश्वविद्यालय के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार कंपनी को पूरा भुगतान किया जाता है। कंपनी अपने कर्मचारियों को कितना वेतन दे रही है, इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस संबंध में पूछताछ की गई थी और यदि दोबारा शिकायत प्राप्त होती है तो कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।

अब शिकायत श्रम विभाग तक पहुंचने के बाद मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बड़ी श्रम अनियमितता के रूप में सामने आ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *