40 से अधिक जर्जर भवनों पर निगम की सुस्ती,नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं सर्वे में सामने आई खतरनाक इमारतें

कमिश्नर के निर्देश के बाद भी इंजीनियरों ने नहीं दी रिपोर्ट
बारिश में बढ़ा हादसे का खतरा
बिलासपुर। शहर में 40 से अधिक जर्जर भवन नगर निगम के लिए बड़ी चिंता का कारण बने हुए
हैं। इन भवनों में कई मकान, दुकानें, सामाजिक
और सामुदायिक भवनों के साथ आंगनबाड़ी केंद्र
समेत करीब 12 सरकारी भवन भी शामिल हैं।
वर्ष 2024 में सर्वे के दौरान इन भवनों को खतरनाक स्थिति में चिह्नित किया गया था, लेकिन करीब दो साल बीतने के बावजूद अब तक एक भी भवन को गिराने की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। निगम की कार्रवाई फिलहाल नोटिस जारी करने तक सीमित नजर आ रही है।
नगर निगम क्षेत्र के 70 वार्डों में 8 अगस्त 2024 को कराए गए सर्वे में कुल 40 से अधिक जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इनमें जोन क्रमांक-1 में 10, जोन क्रमांक-4 में पांच, जोन क्रमांक-5 में 15 और जोन क्रमांक 7 में नौ भवन शामिल थे। सर्वे के बाद संबंधित भवन मालिकों को भवन खाली करने और डिस्मेंटल करने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

दरअसल स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने कुछ माह पहले सभी जोन कमिश्नरों को जर्जर भवनों का दोबारा सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि अब तक मैदानी अमले और संबंधित जोन अधिकारियों की ओर से पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। ऐसे में निगम के पास वर्तमान स्थिति का अद्यतन और पुख्ता रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है।
इधर लगातार बारिश के कारण पहले से जर्जर भवनों की स्थिति और खराब हो गई है। कई भवनों की दीवारों से प्लास्टर और ईंटें गिरने लगी हैं। भवनों में बारिश का पानी पहुंचने से उनकी मजबूती और कम होने की आशंका है। ऐसे में आसपास रहने वाले लोगों के साथ राहगीरों पर भी हादसे का खतरा बना हुआ है।
पांच भवन मालिकों को जारी किया गया नोटिस
वार्ड क्रमांक-30 में मुनू लाल शुक्ल स्कूल, गोंड़पारा के सामने वाली गली में पांच जर्जर भवनों के मालिकों को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया है। निगम ने भवनों को खाली करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अन्य जर्जर भवनों को लेकर भी स्थानीय लोगों ने शिकायतें की हैं और ठोस कार्रवाई की मांग की है।
जूना बिलासपुर से गोंड़पारा तक खतरा
जूना बिलासपुर में साव धर्मशाला के पास स्थित पुराना मकान पूरी तरह जर्जर बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज बारिश और आंधी के दौरान इसके गिरने का खतरा बना रहता है।
पुराना लक्ष्मी टॉकीज रोड पर भी एक मकान और दुकान की स्थिति खराब है। बारिश के पानी से दीवारें कमजोर हो गई हैं और कई जगहों से ईंट व प्लास्टर गिर रहे हैं। वहीं सभापति विनोद सोनी के मकान के पास भी एक जर्जर भवन लंबे समय से लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।गोंड़पारा के व्यस्त मार्ग पर स्थित एक अन्य जर्जर भवन के नीचे से लगातार लोगों और वाहनों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद अब तक यहां भी ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों को लेकर निगम वर्षों से नोटिस जारी करता आ रहा है, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। बारिश के मौसम में जर्जर भवनों से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय निगम को पहले ही खतरनाक भवनों को खाली कराने और सुरक्षित तरीके से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।करीब सात वर्ष पहले चांटापारा में जर्जर भवन गिरने से हुए हादसे का हवाला देते हुए लोगों का कहना है कि निगम प्रशासन को उससे सबक लेते हुए समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।
महापौर बोलीं- अधिकारियों से जवाब-तलब करूंगी
महापौर पूजा विधानी ने कहा कि जर्जर भवनों में लोगों के रहने और मलबा गिरने की जानकारी को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिकारियों से कई बार जानकारी मांगी गई है और उन्हें पूरे मामले की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
महापौर ने कहा कि अधिकारी फिलहाल प्रक्रिया जारी होने की बात कह रहे हैं। शहर लौटने के बाद वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर चर्चा करेंगी और जर्जर भवनों को लेकर आवश्यक कार्रवाई के लिए कड़ाई से जवाब-तलब करेंगी। उन्होंने कहा कि किसी बड़े हादसे की स्थिति बनने से पहले जर्जर भवनों के मामले में कड़ा रुख अपनाने की आवश्यकता है।