आवारा पशुओं और कुत्तों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड,नसबंदी-टीकाकरण की भी होगी ऑनलाइन एंट्री,एक अप्रैल से कार्रवाई का हिसाब देना होगा

प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को भारत पशुधन पोर्टल पर करना होगा पंजीयन
बिलासपुर। प्रदेश के शहरों में घूम रहे आवारा पशुओं और कुत्तों का अब डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों को अपने क्षेत्र के आवारा पशुओं का पंजीयन भारत पशुधन पोर्टल पर करना होगा। इसके साथ ही पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बनाए गए एबीसी सेंटरों की मैपिंग भी पोर्टल पर की जाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।नई व्यवस्था के तहत केवल आवारा पशुओं का पंजीयन ही नहीं होगा, बल्कि उनके लिए की गई नसबंदी और टीकाकरण की कार्रवाई का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं और कुत्तों की संख्या, नसबंदी तथा टीकाकरण की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
एबीसी सेंटरों की भी होगी मैपिंग
पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बनाए गए एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटरों की जानकारी भी भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए नगरीय निकायों को जिला पशु चिकित्सक के साथ समन्वय करना होगा। इससे संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध एबीसी सेंटरों और वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
विभाग ने एक अप्रैल से सितंबर तक की गई नसबंदी और टीकाकरण की कार्रवाई का विवरण भी पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इससे छह महीने के दौरान नगरीय निकायों में आवारा पशुओं के लिए की गई कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश क्षीरसागर ने बताया कि सभी नगरीय निकायों को आवारा पशुओं का पंजीयन भारत पशुधन पोर्टल पर करना होगा। साथ ही पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बनाए गए एबीसी सेंटरों की मैपिंग भी पोर्टल पर की जाएगी।
नसबंदी के बावजूद कम नहीं हुए आवारा कुत्ते
बिलासपुर शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बनी हुई है। नगर निगम के अनुसार पिछले दस वर्षों में 22 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी कराई जा चुकी है। इसके बावजूद सड़क और मोहल्लों में कुत्तों के झुंड कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। बारिश के साथ प्रजनन का समय शुरू होने से कुत्तों के आक्रामक होने की शिकायतें भी बढ़ी हैं। पुराने झुंड वाले इलाकों में रात के समय स्थिति ज्यादा गंभीर रहती है और राहगीरों तथा दोपहिया वाहन चालकों के पीछे कुत्तों के दौड़ने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
एक सप्ताह में सिम्स पहुंचे 459 लोग
आवारा कुत्तों के हमले का असर अस्पतालों में भी दिखाई दे रहा है। सिम्स में पिछले एक सप्ताह में 459 लोग कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे। जिला अस्पताल में भी रोजाना करीब 10 से 15 मरीज डॉग बाइट के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
नगर निगम ने शहर के 70 वार्डों में 78 फीडिंग सेंटर बनाए हैं। इनका उद्देश्य लोगों को घरों और सड़कों के आसपास कुत्तों को खाना खिलाने के बजाय निर्धारित स्थान पर फीडिंग के लिए प्रेरित करना है। हालांकि अधिकांश फीडिंग सेंटर आउटर क्षेत्र में होने के कारण वहां नियमित रूप से फीडिंग नहीं हो पा रही है। इसके चलते कई इलाकों में सड़कों पर कुत्तों के झुंड बने रहते हैं।
इन इलाकों से मिल रही ज्यादा शिकायतें
नगर निगम की हेल्पलाइन निदान 1100 पर टीकापारा, कंवलापारा, पुराना बस स्टैंड, इमलीपारा, पुलिस लाइन रोड, हेमू नगर, शनिचरी बाजार, सरकंडा, कुदुदंड और तालापारा से आवारा कुत्तों के झुंड की शिकायतें पहुंच रही हैं। शिकायत मिलने पर निगम की टीम संबंधित क्षेत्रों में जाकर कुत्तों को पकड़ती है। इन्हें नसबंदी के लिए गोकुलधाम पशु चिकित्सालय ले जाया जाता है। नसबंदी के बाद कुत्तों को वापस उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है।
अपर आयुक्त खजांची कुम्हार के अनुसार बारिश के दौरान ब्रीडिंग सीजन होने के कारण कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं। शिकायत मिलने पर टीम भेजकर कुत्तों को पकड़ा जाता है और गोकुलधाम पशु चिकित्सालय में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में नसबंदी के बाद उन्हें वापस उसी क्षेत्र में छोड़ा जाता है।
कुत्ता काटे तो तुरंत अस्पताल जाएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को तत्काल साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। एंटी रेबीज वैक्सीन समय पर लगवाने से संक्रमण के गंभीर खतरे से बचाव किया जा सकता है।